“पुलिस जांच पर भरोसा नहीं, 87 लोगों के व्हाट्सएप ग्रुप में लीक हो रही जानकारी”… स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का बड़ा हमला

डिजिटल डेस्क- वाराणसी स्थित विद्या मठ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बार फिर पुलिस जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए। दस्तावेजों के साथ मीडिया के सामने आए शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की जांच से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं एक व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से लीक की जा रही हैं। उनका दावा है कि इस ग्रुप में 87 लोग शामिल हैं और आशुतोष ब्रह्मचारी नामक व्यक्ति पुलिस से मिली जानकारी को वहां साझा कर रहा है। शंकराचार्य ने कहा, “जब जांच से जुड़ी हर जानकारी मेरे आरोप लगाने वाले तक पहुंच रही है तो मैं पुलिस पर कैसे भरोसा करूं? यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों की भूमिका जांच प्रक्रिया तक में दिखाई दे रही है।” उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उन्हें पुलिस से किसी तरह की निष्पक्षता की उम्मीद नहीं है और अब उनका भरोसा केवल “ईश्वरीय न्याय” पर ही टिका है।

“हमारे चारों मठ गिरा दे सरकार, गोरक्षा अभियान नहीं रुकेगा”

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने केंद्र और राज्य सरकार पर भी तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि हर सरकार में मतभेद रहे, लेकिन अंततः संवाद हुआ। “सिर्फ बीजेपी की सरकार ऐसी रही जिसने न हमारी बात सुनी और न ही संवाद का प्रयास किया। जब हमने अपनी बात रखनी चाही तो उसे दबाने की कोशिश की गई,” उन्होंने आरोप लगाया। उन्होंने यहां तक कहा कि यदि सरकार चाहे तो उनके चारों मठ गिरा दे, लेकिन इससे उनके अभियान पर कोई असर नहीं पड़ेगा। “हम धर्म के मार्ग पर हैं। यदि हमारे मठ टूटेंगे तो सनातनी समाज हमें 18 नए मठ बनाकर देगा। गोरक्षा का हमारा अभियान जारी रहेगा,” उन्होंने दृढ़ता से कहा।

राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका का दावा

शंकराचार्य ने यह भी कहा कि जिस विद्या मठ और शंकराचार्य परंपरा ने राम जन्मभूमि की कानूनी लड़ाई लड़ी, आज उसी की निष्ठा और चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जब राम जन्मभूमि मामले में पक्षकार बनने की बात आई तो सरकार में बैठे लोग सड़कों पर माहौल बना रहे थे, लेकिन कोर्ट में पक्षकार नहीं बने। “उन्हें भरोसा नहीं था कि अदालत से फैसला आ सकता है। हमारे गुरुजनों और हमने अदालत में 19 दिनों तक लगातार गवाही दी,”। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अनुसार, उनकी गवाही और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने राम जन्मभूमि के पिन-पॉइंट स्थान पर फैसला सुनाया, जिससे मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ।

ऐतिहासिक दस्तावेजों का भी किया जिक्र

उन्होंने बताया कि अयोध्या तीर्थ अन्वेषण समिति की अनुशंसा पर 18वीं सदी में कलक्टर एडवर्ड द्वारा लगवाए गए 158 पत्थरों और जर्मन विद्वान हेन्स बेकर द्वारा निर्धारित अयोध्या की शास्त्रीय चौहद्दी से जुड़े दस्तावेज उनके वकील पीएन मिश्र के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किए गए थे। शंकराचार्य का कहना है कि इन्हीं ऐतिहासिक प्रमाणों के आधार पर जन्मस्थान का निर्धारण हुआ।

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