डिजिटल डेस्क- इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने लोकप्रिय एक्ट्रेस और स्टेज परफॉर्मर सपना चौधरी को बड़ी कानूनी राहत देते हुए उनके पासपोर्ट रिन्यूअल के लिए ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) जारी करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सपना चौधरी को NOC देने से इनकार कर दिया गया था। यह आदेश जस्टिस पंकज भाटिया की एकल पीठ ने CrPC की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सपना चौधरी के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले में उन्हें जमानत दी गई है और जमानत आदेश में देश छोड़ने को लेकर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं लगाई गई थी।
सपना के देश छोड़कर भागने के कोई ठोस सबूत नहीं- हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है, जिससे यह आशंका जताई जा सके कि सपना चौधरी देश से भाग सकती हैं या न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश करेंगी। कोर्ट ने यह भी माना कि आवेदिका के किसी भी प्रकार के गलत आचरण का अभाव है, ऐसे में पासपोर्ट के नवीनीकरण से इनकार करना उचित नहीं है। दरअसल, पिछले साल जून में ट्रायल कोर्ट ने सपना चौधरी की NOC की मांग को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि उन्होंने यात्रा की अवधि, जिस देश में जाना है या यात्रा के उद्देश्य से जुड़े दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किए थे। सपना चौधरी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
वर्ष 2018 के मामले में लगी थी रोक
सपना चौधरी पर वर्ष 2018 में लखनऊ में एक शो रद्द करने को लेकर IPC की धारा 406 और 420 के तहत FIR दर्ज की गई थी। इस मामले में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है और उन पर कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़ने से संबंधित कोई शर्त लागू नहीं की गई थी। हाईकोर्ट में सपना चौधरी की ओर से दलील दी गई कि पासपोर्ट न मिलने से न केवल उनके संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत विदेश यात्रा के अधिकार का हनन हो रहा है, बल्कि उनकी आजीविका कमाने के अधिकार पर भी प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वकील ने यह भी बताया कि सपना चौधरी के दो बच्चे हैं, भारत में उनकी स्थायी संपत्ति है और उनके फरार होने की कोई संभावना नहीं है।
‘महेश कुमार अग्रवाल बनाम भारत संघ का दिया हवाला
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि पासपोर्ट का नवीनीकरण कोई मौलिक अधिकार नहीं है और यह पासपोर्ट अधिनियम की धारा 6(2) में दी गई शर्तों के अधीन है। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘महेश कुमार अग्रवाल बनाम भारत संघ’ मामले का हवाला देते हुए कहा कि स्वतंत्रता कोई सरकारी कृपा नहीं, बल्कि राज्य का मूल दायित्व है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पासपोर्ट जारी करना और कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़ने पर रोक, दोनों अलग-अलग विषय हैं।