KNEWS DESK- नेपाल में आम चुनावों की मतगणना से संकेत मिल रहे हैं कि देश की राजनीति में बड़ा उलटफेर होने वाला है। रैपर से नेता बने बालेन शाह की नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) इस चुनाव में अप्रत्याशित रूप से मजबूत प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है। शुरुआती रुझानों के अनुसार आरएसपी कई सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जिससे पारंपरिक राजनीतिक दलों के लिए चुनौती खड़ी हो गई है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आरएसपी अब तक छह सीटें जीत चुकी है और 100 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। खास बात यह है कि बालेन शाह झापा-5 सीट से चार बार के प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष केपी शर्मा ओली के खिलाफ मजबूत स्थिति में बताए जा रहे हैं। शुरुआती मतगणना में शाह को 15 हजार से ज्यादा वोट मिले हैं, जबकि ओली को करीब 3,300 वोट प्राप्त हुए हैं।
नेपाल की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 165 सांसद प्रत्यक्ष मतदान यानी फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट (FPTP) प्रणाली से चुने जाते हैं, जबकि 110 सीटें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से भरी जाती हैं। ऐसे में अंतिम परिणाम आने में अभी समय लग सकता है, लेकिन रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि इस बार मतदाताओं ने पारंपरिक दलों से हटकर नए विकल्प को प्राथमिकता दी है।
35 वर्षीय इंजीनियर और लोकप्रिय सार्वजनिक व्यक्तित्व बालेन शाह को नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं के साथ देखा जा रहा है। उनका उभार देश में स्थापित राजनीतिक दलों के प्रति बढ़ती नाराजगी को दर्शाता है। पिछले 18 वर्षों में नेपाल में 14 सरकारें बदल चुकी हैं, जिससे राजनीतिक अस्थिरता लगातार बनी रही है।
भारत भी नेपाल के चुनावी नतीजों पर करीबी नजर बनाए हुए है। भारत को उम्मीद है कि नई सरकार बनने के बाद दोनों देशों के बीच विकास और सहयोग के क्षेत्र में साझेदारी और मजबूत होगी। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नेपाल की नई सरकार के साथ मिलकर द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत लंबे समय से नेपाल में शांति, स्थिरता और प्रगति का समर्थन करता रहा है और चुनावों के आयोजन के लिए नेपाल सरकार के अनुरोध पर आवश्यक लॉजिस्टिक सहायता भी प्रदान की गई है।
अन्य दलों की स्थिति पर नजर डालें तो नेपाली कांग्रेस ने अब तक दो सीटें जीती हैं और कई अन्य सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं सीपीएन-यूएमएल भी कुछ सीटों पर आगे चल रही है। इसके अलावा नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य छोटे दल भी सीमित सीटों पर बढ़त हासिल किए हुए हैं।
इस चुनाव में करीब 1.89 करोड़ नेपाली मतदाता मतदान के पात्र थे। चुनाव प्रक्रिया के तहत 165 सांसद प्रत्यक्ष मतदान से और 110 सांसद आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुने जाने हैं।
बालेन शाह का राजनीतिक उदय पिछले साल सितंबर में हुए जनरेशन-ज़ेड के विरोध प्रदर्शनों के बाद तेजी से हुआ। उस समय भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंधों के खिलाफ देशभर में हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसके बाद केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता छोड़नी पड़ी थी।
हालांकि उस समय बालेन शाह को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए एक लोकप्रिय विकल्प माना जा रहा था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया। उनका कहना था कि वे संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण जनादेश के साथ सरकार का नेतृत्व करना चाहते हैं। बाद में वे राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी से जुड़े और जल्द ही उन्हें पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया।
चुनावी अभियान के दौरान बालेन शाह को युवाओं और शहरी मतदाताओं का व्यापक समर्थन मिला। अब मतगणना के शुरुआती रुझान यह संकेत दे रहे हैं कि नेपाल की जनता इस बार नई राजनीतिक दिशा की ओर बढ़ सकती है।