मिडिल ईस्ट जंग का असर, भारत में LPG सप्लाई पर संकट, रेस्टोरेंट और घरों में हाहाकार

KNEWS DESK- देश में मिडिल ईस्ट की बढ़ती तनावपूर्ण स्थिति का असर अब भारत के घरेलू और कमर्शियल किचन तक पहुँचने लगा है। खासकर एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है, क्योंकि भारत अपनी घरेलू एलपीजी जरूरत का करीब 60% से अधिक हिस्सा इम्पोर्ट पर निर्भर करता है। इनमें से लगभग 85-90% इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है, जिससे सप्लाई चेन कमजोर हो सकती है।

भारत में हर साल करीब 31 मिलियन टन एलपीजी का उपयोग होता है, जिसमें से 87% घरेलू सेक्टर के लिए इस्तेमाल किया जाता है। बाकी हिस्सा मुख्यतः होटलों, रेस्टोरेंट्स और कमर्शियल किचन में जाता है।

ईरान और इजरायल के बीच जंग दूसरे हफ्ते में पहुँच चुकी है, जिससे कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने लगी है। इसका असर हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर भी पड़ने लगा है। कई रेस्टोरेंट्स में किचन संचालन धीमा हो गया है, और अगर सप्लाई में रुकावट बनी रही, तो आम खाने के विकल्प जैसे वड़ा पाव, मसाला डोसा या अन्य स्थानीय व्यंजन महंगे हो सकते हैं या कुछ समय के लिए मेन्यू से गायब भी हो सकते हैं।

मुख्य कारण यह है कि हॉस्पिटैलिटी सेक्टर रोज़ाना किचन के काम के लिए कमर्शियल एलपीजी पर अत्यधिक निर्भर है। अधिकांश रेस्टोरेंट्स के पास पीएनजी (PNG) कनेक्टिविटी या बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रिक कुकिंग सिस्टम जैसे विकल्प मौजूद नहीं हैं।

इस सप्लाई संकट का असर केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं है। पुणे, भोपाल, पुडुचेरी जैसे शहरों में भी रेस्टोरेंट्स और होटल्स की किचन ऑपरेशन्स प्रभावित हो रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मध्य पूर्व का तनाव लंबा चला, तो एलपीजी की कीमतों में वृद्धि और कमर्शियल सप्लाई में और कमी देखने को मिल सकती है।

सरकार और एलपीजी कंपनियां घरेलू उपभोक्ताओं को प्रभावित न होने देने के लिए सप्लाई व्यवस्था को मजबूत करने पर काम कर रही हैं। इसके बावजूद हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को कुछ दिनों तक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

इस स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत की एलपीजी इम्पोर्ट निर्भरता और मिडिल ईस्ट स्थितियों के बीच गहरा कनेक्शन है, और इस पर सतत निगरानी की जरूरत है।

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