डिजिटल डेस्क- मध्य पूर्व में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम हाई लेवल बैठक करने जा रहे हैं। यह बैठक शुक्रवार शाम 6:30 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित होगी, जिसमें मौजूदा वैश्विक संकट और उसके भारत पर पड़ रहे असर पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे, क्योंकि वहां आचार संहिता लागू है। हालांकि, उन राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक अलग बैठक कैबिनेट सचिवालय के माध्यम से आयोजित की जाएगी, ताकि सभी राज्यों के साथ समन्वय बना रहे। इस संवाद का मुख्य उद्देश्य मिडिल ईस्ट के हालात को लेकर राज्यों की तैयारियों और रणनीतियों की समीक्षा करना है। केंद्र सरकार इस संकट की घड़ी में “टीम इंडिया” की भावना के साथ केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल सुनिश्चित करना चाहती है। प्रधानमंत्री पहले ही इस मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों को संबोधित कर चुके हैं और हालात को बेहद गंभीर बताया है।
संघर्ष का असर सिर्फ भारत ही नहीं पूरी दुनिया पर
पीएम मोदी ने कहा था कि पश्चिम एशिया में चल रहा संकट तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है और इसका असर सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी थी कि इस संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार और आम लोगों के जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। भारत के संदर्भ में यह संकट कई स्तरों पर चुनौती बनकर उभरा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, देश को आर्थिक, राष्ट्रीय सुरक्षा और मानवीय—तीनों मोर्चों पर सतर्क रहने की जरूरत है। खासकर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा होता है।
खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि
इसके अलावा, खाड़ी क्षेत्र में करीब एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं, जिनकी सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। Strait of Hormuz जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ने से वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ रहा है। हालांकि, सरकार ने यह भरोसा दिलाया है कि देश के पास 53 लाख मीट्रिक टन का रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सुरक्षित है, जिससे आपूर्ति पर तत्काल कोई संकट नहीं आएगा। प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया है कि उर्वरकों (फर्टिलाइजर) की सप्लाई पर असर पड़ सकता है, लेकिन देश में फिलहाल पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संकट का समाधान केवल शांति और संवाद के जरिए ही संभव है और भारत इसी दिशा में प्रयास कर रहा है।
गुरूवार को हुई थी सर्वदलीय बैठक
कूटनीतिक स्तर पर भी भारत सक्रिय है। प्रधानमंत्री मोदी इजराइल, ईरान, अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में हैं, ताकि तनाव को कम किया जा सके और क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। इससे पहले गुरुवार को सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक भी बुलाई थी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने की। बैठक में सरकार ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि देश में पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी नहीं है और घबराने की जरूरत नहीं है। साथ ही यह भी बताया गया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से चार भारतीय जहाज सुरक्षित निकल चुके हैं।