KNEWS DESK- जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के सीजफायर पर खुशी जताई है। महबूबा ने इसे “बहुत खुशी का दिन” बताया और अल्लाह का शुक्र अदा किया कि उसने ईरान को इजराइल के खिलाफ खड़े होने का साहस दिया। उन्होंने पाकिस्तान की भी तारीफ की और कहा कि मध्यस्थता में उसकी भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके जरिए “पूरी दुनिया को बचाया गया।”
महबूबा ने कहा कि ईरान ने इस युद्ध में केवल सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिका और इजराइल ने स्कूल, अस्पताल और नागरिक इलाकों को भी टारगेट किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अस्थायी संघर्ष-विराम स्थायी शांति की दिशा में पहला कदम साबित होगा और ईरान में भी शांति कायम होगी।
वहीं, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सीजफायर के नतीजों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने 40 दिन के संघर्ष के बाद अमेरिका द्वारा हासिल परिणामों पर संदेह जताया। होर्मुज स्ट्रेट को युद्धविराम के तहत पुनः खोलने की खबरों पर उन्होंने ‘#UnjustWar’ हैशटैग के साथ प्रतिक्रिया दी और पूछा कि यह रास्ता पहले भी सभी के उपयोग के लिए खुला था, तो इस युद्ध से अमेरिका को वास्तव में क्या लाभ हुआ।
अमेरिका और ईरान ने दो हफ्ते के लिए अस्थायी संघर्ष-विराम पर सहमति जताई है। इसके तहत प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को इस्लामाबाद में आमने-सामने बैठक करने की उम्मीद रखते हैं। यह मार्च के बाद से युद्धरत देशों के बीच पहला खुला राजनयिक संपर्क माना जा रहा है। इस दौरान ईरान, अमेरिका और इजराइल ने युद्धविराम का पालन करने का निर्णय लिया है।
महबूबा मुफ्ती की प्रतिक्रिया और उमर अब्दुल्ला की टिप्पणियां दर्शाती हैं कि भारत में इस युद्धविराम को लेकर मिश्रित भावनाएं हैं। एक ओर जहां कई लोगों ने पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की है, वहीं कुछ नेताओं ने युद्ध के वास्तविक लाभ और रणनीतिक परिणामों पर सवाल उठाए हैं।