मेरठः अंधविश्वास के जाल में फंसे पिता ने ली थी प्रियंका की जान, 5 महीने बेटी की लाश के साथ रहने वाले पिता का सामने आया सच

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। सदर बाजार क्षेत्र के तेली मोहल्ले में एक रिटायर्ड कर्मचारी ने अपनी ही बेटी का शव करीब पांच महीने तक घर में छिपाकर रखा। इस घटना ने अंधविश्वास, मानसिक असंतुलन और सामाजिक अलगाव के खतरनाक मेल को उजागर कर दिया है। मामले का खुलासा तब हुआ जब आरोपी उदय भानू विश्वास के परिजनों को उसके घर पर लंबे समय से ताला बंद होने पर शक हुआ। जब दरवाजा खोला गया तो अंदर का मंजर किसी “भूत बंगले” से कम नहीं था। घर में चारों ओर गंदगी, सड़ा-गला सामान और तेज दुर्गंध फैली हुई थी। एक कमरे में युवती का कंकाल पड़ा मिला, जिसे देख हर कोई सन्न रह गया। इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।

दो साल तक नहीं की घर की सफाई, गंदगी में रहने का हो गया था आदी

जांच में सामने आया कि मृतका की पहचान प्रियंका के रूप में हुई है, जो आरोपी की बेटी थी। पूछताछ के दौरान उदय भानू ने बताया कि उसकी बेटी की मौत नवंबर 2025 में हो गई थी। लेकिन अंधविश्वास और मानसिक अस्थिरता के चलते उसने न तो किसी को इसकी जानकारी दी और न ही अंतिम संस्कार किया। वह शव से उठने वाली बदबू को छिपाने के लिए उस पर लगातार परफ्यूम छिड़कता रहा। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने यह भी कबूल किया कि पिछले दो वर्षों से उसने घर की साफ-सफाई तक नहीं की थी और वह उसी माहौल में रहने का आदी हो चुका था। बेटी की मौत के बाद वह घर में ताला लगाकर हरिद्वार और देहरादून चला गया। इस दौरान जब भी रिश्तेदारों ने प्रियंका के बारे में पूछा, तो उसने इलाज चलने का झूठा बहाना बनाया।

तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर के पास ले जाने की बजाय लिया तंत्र क्रियाओं का सहारा

जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है। बताया जा रहा है कि साल 2013 में पत्नी की आत्महत्या के बाद उदय भानू मानसिक रूप से टूट गया था। उसे शक था कि उसके रिश्तेदारों ने तंत्र-मंत्र के जरिए उसकी पत्नी को उससे छीन लिया। इसी शक और डर के चलते वह धीरे-धीरे समाज से कटता चला गया और अंधविश्वास के जाल में फंसता गया। जब जुलाई 2025 में प्रियंका की तबीयत बिगड़ी, तब भी उसने उसे डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय तांत्रिक क्रियाओं और झाड़-फूंक का सहारा लिया। इससे उसकी हालत और बिगड़ती गई, जो अंततः उसकी मौत का कारण बन सकती है। हालांकि, इसकी पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। हैरानी की बात यह भी है कि आरोपी हरिद्वार गया था और वहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के बारे में जानकारी ली थी। लेकिन जब उसे करीब 8 हजार रुपये खर्च का अंदाजा हुआ, तो वह वापस लौट आया और बेटी का अंतिम संस्कार नहीं कर सका।

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