CBSE से मान्यता के लिए भूमि नियमों में बड़ा बदलाव, अब स्कूलों के पास 2000 वर्ग मीटर के खेल का मैदान होना जरूरी

डिजिटल डेस्क- केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूलों की मान्यता से जुड़े भूमि मानकों में बड़ा संशोधन किया है। बोर्ड ने पुराने प्रावधानों को समाप्त करते हुए नया क्लॉज लागू किया है, जिसके तहत अब देश के अलग-अलग शहरों और क्षेत्रों के लिए न्यूनतम भूमि सीमा तय कर दी गई है। इस फैसले का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण परिस्थितियों के अनुसार स्कूलों को व्यावहारिक राहत देना और साथ ही छात्रों की बुनियादी सुविधाओं को सुनिश्चित करना बताया जा रहा है। CBSE के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी संबद्ध स्कूलों में कम से कम 2000 वर्ग मीटर का खेल मैदान अनिवार्य होगा। जिन स्कूलों के पास कुल भूमि 6000 वर्ग मीटर से कम है, उन्हें या तो अपने परिसर के भीतर यह खेल मैदान उपलब्ध कराना होगा या फिर किसी नजदीकी स्कूल, कॉलेज, स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स या सार्वजनिक पार्क के साथ कम से कम 15 वर्षों का लिखित समझौता करना होगा। यह खेल सुविधा स्कूल से अधिकतम 200 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए और छात्रों को वहां पहुंचने के लिए किसी व्यस्त मुख्य सड़क या राष्ट्रीय राजमार्ग को पार नहीं करना पड़ेगा।

स्कूल भवन की ऊंचाई और कवर्ड एरिया पर भी स्पष्टता

CBSE ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्कूल भवन की ऊंचाई और उसका कवर्ड एरिया संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के भवन उपविधियों (बिल्डिंग बायलॉज) के अनुसार ही होगा। यानी स्कूलों को स्थानीय प्रशासन द्वारा तय नियमों का पालन करना अनिवार्य रहेगा। इससे अलग-अलग राज्यों में निर्माण को लेकर पहले से लागू कानूनों के साथ तालमेल बना रहेगा।

अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग भूमि मानक

बोर्ड ने देश की भौगोलिक और शहरी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भूमि मानकों को वर्गीकृत किया है। मेट्रो शहरों और राज्य की राजधानियों के लिए जमीन की आवश्यकता अलग रखी गई है, जबकि पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और विशेष श्रेणी के क्षेत्रों को अतिरिक्त छूट दी गई है। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता जैसे महानगरों में सेकेंडरी स्कूल के लिए न्यूनतम 1600 वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य होगी। वहीं सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के लिए 2400 से 3200 वर्ग मीटर भूमि का प्रावधान किया गया है। यह सीमा स्कूल के लेआउट, सुविधाओं और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर तय की जाएगी। दूसरी ओर, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप जैसे दुर्गम और सीमित भूमि वाले क्षेत्रों में स्कूलों को विशेष छूट दी गई है। इन इलाकों में भौगोलिक कठिनाइयों और जमीन की उपलब्धता को देखते हुए लचीला रवैया अपनाया गया है।

पुराने स्कूलों को राहत

CBSE ने साफ किया है कि यह नया भूमि मानक केवल नए स्कूलों या नई मान्यता के लिए लागू होगा। जो स्कूल पहले से CBSE से जुड़े हुए हैं, उन पर पुराने प्रावधान ही लागू रहेंगे। इससे पहले से संचालित स्कूलों पर किसी तरह का अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि CBSE का यह फैसला शहरी क्षेत्रों में नए स्कूल खोलने की राह आसान करेगा, वहीं खेल मैदान जैसी जरूरी सुविधाओं को अनिवार्य बनाकर छात्रों के सर्वांगीण विकास पर भी जोर देगा।