KNEWS DESK- महाशिवरात्रि का पावन पर्व भगवान Shiva की आराधना का सर्वोत्तम दिन माना जाता है। फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाने वाला यह उत्सव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा लेकर आता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है।
महाशिवरात्रि के दिन व्रत रखकर रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। शिवलिंग पूजन करते समय दिशा का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। पूजा करते समय आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। इससे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और साधना का फल कई गुना बढ़ जाता है।
शिवलिंग को साक्षात महादेव का स्वरूप माना गया है। अतः पूजा की शुरुआत शुद्ध जल से अभिषेक कर करें। इसके बाद पंचामृत—दूध, दही, घी, शहद और शक्कर—से अभिषेक करना अत्यंत फलदायी माना गया है।अभिषेक करते समय “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करते रहें। यह मंत्र मानसिक शांति, आत्मबल और सकारात्मकता प्रदान करता है। पंचामृत के बाद पुनः शुद्ध जल या गंगाजल से शिवलिंग को स्नान कराएं, जिससे अभिषेक पूर्ण माना जाता है।
पूजन के पश्चात भगवान शिव को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करना शुभ फलदायी होता है—बेलपत्र: तीन पत्तों वाला और बिना टूटा हुआ बेलपत्र ही अर्पित करें। इसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें।धतूरा और भांग: ये वस्तुएं शिव को अत्यंत प्रिय हैं और सरलता व त्याग का प्रतीक मानी जाती हैं।मदार (आक) के पुष्प: इनका अर्पण भी विशेष पुण्यदायक होता है।
अभिषेक के बाद शिवलिंग पर सफेद चंदन का तिलक लगाएं। सफेद चंदन शांति और पवित्रता का प्रतीक है। पूजा में भस्म का विशेष महत्व है, क्योंकि यह जीवन की नश्वरता और वैराग्य का संदेश देती है। यदि संभव हो तो भस्म से त्रिपुंड अंकित करें।इसके बाद धूप-दीप प्रज्वलित कर श्रद्धापूर्वक आरती करें और अपनी मनोकामनाएं व्यक्त करें। ध्यान रखें कि शिवलिंग पर कभी भी हल्दी या कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए।