KNEWS DESK- महाराष्ट्र में आगामी महानगर पालिका चुनावों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि मतदान की तारीख अभी दूर है, लेकिन कई सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने जा चुके हैं। इस बीच, निर्विरोध जीत पर सवाल उठने लगे हैं, जिसके चलते राज्य चुनाव आयोग ने कुछ सीटों पर जांच के आदेश जारी किए हैं। आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नामांकन वापसी दबाव या लालच के कारण तो नहीं हुई है।
चुनावों में महायुति गठबंधन के 68 उम्मीदवारों ने बिना मुकाबले जीत दर्ज की है। इनमें बीजेपी के 44, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के 22 और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के 2 उम्मीदवार शामिल हैं। सबसे खास बात यह है कि कल्याण-डोंबिवली क्षेत्र में बीजेपी के 14 उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं, जो इस क्षेत्र में महायुति की मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
निर्विरोध चुनाव की इतनी बड़ी संख्या ने विपक्ष और आम जनता में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि विपक्षी दलों के नामांकन वापस लेने के कारण महायुति को यह फायदा मिला है। हालांकि, चुनाव आयोग इसे गंभीरता से ले रहा है और इस मामले की गहन जांच कर रहा है। आयोग यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि उम्मीदवारों ने स्वतंत्र रूप से नाम वापस लिया है या राजनीतिक दबाव में आए हैं।
चुनाव आयोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया के सही पालन को सुनिश्चित करना चाहता है ताकि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी हों।
महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) सहित 29 महानगरपालिकाओं के चुनाव के नामांकन वापसी की अंतिम तिथि 2 जनवरी थी। मतदान 15 जनवरी को होगा, जबकि चुनाव परिणाम 16 जनवरी को घोषित किए जाएंगे।
निर्विरोध 68 सीटों का महाविकास अघाड़ी गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि इससे उनकी चुनावी पकड़ कमजोर हो सकती है। इस स्थिति ने राजनीतिक समीकरणों को भी बदल दिया है और चुनावी लड़ाई और भी दिलचस्प हो गई है।