यमुना प्रदूषण पर केजरीवाल का चुनाव आयोग को जवाब, सियासत गरमाई

KNEWS DESK-   दिल्ली में यमुना नदी में अमोनिया प्रदूषण को लेकर सियासत तेज हो गई है, खासकर दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 के एलान के बाद से राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर बढ़ता जा रहा है। राजधानी में 5 फरवरी को मतदान होगा, और 8 फरवरी को मतगणना होगी, ऐसे में सभी सियासी दल चुनाव प्रचार में जोर-शोर से जुटे हुए हैं। इस बीच, आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने यमुना के प्रदूषण को लेकर चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए दूसरे नोटिस का जवाब दिया है।

केजरीवाल का चुनाव आयोग पर आरोप

अरविंद केजरीवाल ने चुनाव आयोग को भेजे गए अपने जवाब में कहा कि वह हैरान हैं कि चुनाव आयोग ने हरियाणा के मुख्यमंत्री को दिल्ली के पानी को प्रदूषित करने से रोकने के लिए कोई आदेश पारित नहीं किया। इसके बजाय, उन्होंने मुझे परेशान करने का निर्णय लिया। केजरीवाल का यह बयान इस मुद्दे पर सियासी तापमान को और बढ़ा रहा है, क्योंकि वह लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि यमुना में अमोनिया प्रदूषण का मुख्य कारण हरियाणा से आ रहा प्रदूषित पानी है।

यमुना प्रदूषण को लेकर बढ़ी सियासी जुबानी जंग

दिल्ली में यमुना प्रदूषण को लेकर यह आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बढ़ते हुए चुनावी माहौल में सियासी दलों के बीच चर्चा का मुख्य मुद्दा बन गया है। अरविंद केजरीवाल के बयान के बाद सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। बीजेपी ने जहां केजरीवाल सरकार पर प्रदूषण नियंत्रण के पर्याप्त उपाय न करने का आरोप लगाया, वहीं कांग्रेस ने इस मुद्दे पर बीजेपी और आप दोनों को घेरते हुए इसे एक गंभीर विषय बताया।

चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल

चुनाव आयोग द्वारा केजरीवाल को भेजे गए नोटिस पर राजनीतिक दलों के बीच बहस भी तेज हो गई है। कुछ विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रतीत होती है, जबकि अन्य ने इसे आवश्यक कदम बताते हुए पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।

चुनाव के बीच प्रदूषण का मुद्दा

दिल्ली में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदूषण और जल संकट जैसे मुद्दे प्रमुख बनते जा रहे हैं। यमुना नदी में अमोनिया प्रदूषण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच चुनावी बयानबाजी का सिलसिला भी जारी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में इस मुद्दे पर और कौन सी प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं, और क्या यह प्रदूषण का मुद्दा चुनावी लाभ लेने के लिए सियासी हथियार बनेगा।

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