डिजिटल डेस्क- संभल हिंसा मामले में बड़ा प्रशासनिक और सियासी घटनाक्रम सामने आया है। जिस जज ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था, उनका तबादला कर दिया गया है। संभल के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विभांशु सुधीर को सुल्तानपुर स्थानांतरित कर दिया गया है। खास बात यह है कि उन्हें सीजेएम पद से हटाकर सिविल जज (सीनियर डिविजन) बनाया गया है। इसी को लेकर अब यह सवाल उठ रहा है कि यह सामान्य तबादला है या फिर पदावनति (डिमोशन)। दरअसल, सीजेएम विभांशु सुधीर ने संभल में शाही मस्जिद के पास हुई हिंसा के मामले में कड़ा रुख अपनाया था। उन्होंने 9 जनवरी को एएसपी अनुज चौधरी, संभल के पूर्व सीओ और अन्य पुलिसकर्मियों समेत कुल 20 अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। यह आदेश हिंसा के दौरान गोली लगने से आलम नाम के युवक की मौत के मामले में दिया गया था। कोर्ट के इस फैसले के बाद पुलिस महकमे में हलचल मच गई और मामला राजनीतिक रूप से भी गरमा गया।
एफआईआर के बाद ही आ गया तबादले का फरमान- अखिलेश यादव
एफआईआर के आदेश के कुछ ही समय बाद सीजेएम विभांशु सुधीर के तबादले का फरमान सामने आ गया। इससे यह चर्चा तेज हो गई कि क्या न्यायिक फैसले के चलते उन्हें हटाया गया है। इस बीच संभल के एसपी ने अदालत के आदेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी और कोर्ट के फैसले को चुनौती दी जाएगी। पुलिस का दावा है कि इस पूरे मामले में पहले ही न्यायिक जांच हो चुकी है। इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है।
सत्य स्थानांतरित नहीं होता, उसका स्थान अचल – अखिलेश यादव
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “सत्य स्थानांतरित नहीं होता, उसका स्थान अचल है। न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हनन सीधे-सीधे लोकतंत्र का हनन है। स्वतंत्र न्यायपालिका ही संविधान की अभिभावकीय सुरक्षा कर सकती है।” अखिलेश यादव ने इशारों-इशारों में इस तबादले को न्यायपालिका पर दबाव के रूप में देखा। उधर, प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित तबादला बताया जा रहा है, लेकिन कानूनी जानकारों का कहना है कि सीजेएम जैसे पद से हटाकर सिविल जज बनाया जाना असामान्य है और इससे कई सवाल खड़े होते हैं। अब संभल में नए सीजेएम के रूप में सिविल जज आदित्य सिंह की नियुक्ति कर दी गई है।