भारत-पोलैंड वार्ता में जयशंकर का सख्त संदेश, रूस-यूक्रेन युद्ध के नाम पर भारत को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना अनुचित

डिजिटल डेस्क- नई दिल्ली में भारत और पोलैंड के बीच उच्चस्तरीय कूटनीतिक बातचीत के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में भारत की चिंताओं को सामने रखा। पोलैंड के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री रादोस्लाव सिकोर्स्की इन दिनों भारत यात्रा पर हैं और इसी क्रम में उन्होंने सोमवार को दिल्ली में विदेश मंत्री जयशंकर से मुलाकात की। बैठक के दौरान रूस-यूक्रेन युद्ध, वैश्विक भू-राजनीतिक हालात, आतंकवाद और भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने रूस-यूक्रेन युद्ध के नाम पर भारत को “चुनिंदा और अनुचित तरीके” से निशाना बनाए जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि भारत पर टैरिफ और अन्य दबावकारी हथकंडों के जरिए दबाव बनाया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। जयशंकर ने दो टूक कहा कि भारत संघर्ष का समाधान संवाद और कूटनीति से चाहता है और किसी भी गुट के पक्ष में जबरन खड़ा किए जाने का विरोध करता रहा है।

देशों को निशाना बनाना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायपूर्ण- जयशंकर प्रसाद

विदेश मंत्री ने कहा कि उन्होंने इससे पहले न्यूयॉर्क और पेरिस में भी मंत्री सिकोर्स्की के समक्ष भारत का पक्ष स्पष्ट रूप से रखा था और अब एक बार फिर वही बात दोहराई जा रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक संकटों में देशों को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायपूर्ण। बैठक में भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की भी समीक्षा की गई। जयशंकर ने पोलिश प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा कि यह मुलाकात वैश्विक मामलों में “काफी उथल-पुथल” के दौर में हो रही है, जिससे आपसी संवाद और सहयोग पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने बताया कि दोनों देश कार्य योजना 2024-28 की समीक्षा करेंगे, जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, स्वच्छ प्रौद्योगिकी और डिजिटल नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर फोकस रहेगा।

सीमा पार आतंकवाद का किया जिक्र

आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने अपना रुख बेहद स्पष्ट रखा। विदेश मंत्री जयशंकर ने सीमा पार आतंकवाद का जिक्र करते हुए कहा कि भारत लंबे समय से इस चुनौती का सामना कर रहा है और इस मामले में किसी भी तरह के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि पोलैंड आतंकवाद के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाएगा और भारत के पड़ोस में आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली ताकतों का समर्थन नहीं करेगा। इसे पाकिस्तान के संदर्भ में भारत की कड़ी चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।

दोनों देशों के मध्य है 7 अरब डॉलर का व्यापार

गौरतलब है कि पोलैंड के उपप्रधानमंत्री ने अक्टूबर 2025 में पाकिस्तान यात्रा के दौरान संयुक्त बयान में कश्मीर का उल्लेख किया था, जिसकी भारत ने कड़ी आलोचना की थी। इसी पृष्ठभूमि में भारत ने इस बैठक में अपनी संवेदनशीलताओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा। व्यापारिक रिश्तों की बात करें तो जयशंकर ने बताया कि पोलैंड मध्य यूरोप में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। दोनों देशों के बीच करीब 7 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार है, जबकि पोलैंड में भारत का निवेश 3 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, जिससे वहां रोजगार के कई अवसर पैदा हुए हैं।

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