KNEWS DESK – खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और ईरान पर अमेरिका व इजराइल के हमलों के बीच, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में विस्तृत बयान दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में जारी युद्ध और इससे होने वाली तबाही भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
जयशंकर ने कहा कि नरेंद्र मोदी लगातार क्षेत्रीय हालात पर नजर बनाए हुए हैं और खाड़ी के कई देशों से खुद बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री से भी संपर्क किया और यह स्पष्ट किया कि भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई सरकार की प्राथमिकता है।
भारतीय समुदाय की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
विदेश मंत्री ने बताया कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ईरान में भी कुछ हजार भारतीय छात्र और नौकरी पेशा नागरिक हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय दूतावास ने तेहरान में कई छात्रों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया है और बिजनेस सिलसिले में आए नागरिकों को आर्मेनिया होते हुए भारत लौटने में मदद की गई।”
उन्होंने बताया कि कल तक लगभग 67,000 भारतीय नागरिक अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पार कर चुके हैं और पूरे क्षेत्र से लोगों को सुरक्षित निकालने की लगातार कोशिश जारी है।
क्षेत्रीय स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा
जयशंकर ने कहा कि यह इलाका भारत की एनर्जी सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। “तेल और गैस के कई प्रमुख सप्लायर इसी क्षेत्र में हैं। सप्लाई चेन में रुकावट और अस्थिरता हमारे लिए गंभीर समस्या है।” उन्होंने बताया कि अमेरिका और इजराइल के हमले के बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की, जिससे क्षेत्र में तनातनी बढ़ी और ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई।
शांति और कूटनीति के पक्ष में भारत
विदेश मंत्री ने राज्यसभा में जोर दिया कि भारत शांति, संयम और कूटनीति की वापसी के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “हम आम लोगों की सुरक्षा, तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की दिशा में काम कर रहे हैं।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि सरकार ने 20 फरवरी को पहले ही गहरी चिंता जताई थी और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की थी।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास पूरी तरह सक्रिय और हाई अलर्ट पर है, ताकि संकटग्रस्त क्षेत्र में फंसे नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद क्षेत्र में जल्द से जल्द सामान्य हालात बहाल करना और भारतीय समुदाय को सुरक्षित वापस लाना है।”