डिजिटल डेस्क- मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीचईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच इस्लामाबाद में युद्धविराम को लेकर अहम वार्ता जारी है। इससे पहले दोनों देशों के बीच दो हफ्तों के सीजफायर का ऐलान हो चुका है, जिससे क्षेत्र में अस्थायी राहत मिली है। हालांकि, बातचीत के इस दौर में कई जटिल मुद्दे सामने आ रहे हैं, जिन पर सहमति बनना अभी बाकी है। वार्ता को लेकर शुरुआती संकेत सकारात्मक बताए जा रहे हैं, लेकिन ईरान ने साफ तौर पर कहा है कि उसे अमेरिका पर पूरी तरह भरोसा नहीं है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि पहले भी समझौतों के बावजूद अमेरिका ने कई बार अपने रुख में बदलाव किया है, इसलिए इस बार किसी भी समझौते में ठोस गारंटी जरूरी होगी।
ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके- ट्रंप
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वार्ता को लेकर अपनी प्राथमिकता स्पष्ट कर दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। यह मुद्दा लंबे समय से दोनों देशों के बीच तनाव का प्रमुख कारण रहा है। बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका के सामने कुछ अहम शर्तें रखी हैं। ईरान की पहली मांग है कि उसकी विदेशों में जब्त की गई फ्रीज संपत्तियों को बहाल किया जाए। दूसरी शर्त लेबनान में चल रहे हमलों को तुरंत रोकने की है। ईरान का कहना है कि इन शर्तों के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है।
ईरान की शर्तों पर सहमति बनने की संभावना
हालांकि, अमेरिकी पक्ष ने इन मांगों पर सख्त रुख अपनाया है। व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि फिलहाल ईरान की फ्रीज संपत्तियों को रिलीज करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि अमेरिका कतर और अन्य देशों में रखी ईरान की संपत्तियों को बहाल करने के लिए तैयार हो गया है, लेकिन अमेरिकी प्रशासन ने इन खबरों को खारिज कर दिया है। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि ईरान की शर्तों पर सहमति बनने की संभावना है और बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।