मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की ऊर्जा रणनीति सफल, होर्मुज संकट के बावजूद सप्लाई स्थिर

डिजिटल डेस्क- मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से वैश्विक स्तर पर तेल और गैस आपूर्ति पर असर पड़ा है। यह वही समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा संसाधनों का परिवहन होता है। हालात के बीच ईरान द्वारा इस मार्ग को बाधित करने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में चिंता बढ़ा दी है। भारत, जो दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है, इस संकट से प्रभावित देशों में शामिल रहा, लेकिन अब तक देश के बाजारों पर इसका सीमित असर ही देखने को मिला है। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा इसी होर्मुज मार्ग के जरिए आयात करता है। बावजूद इसके, सरकार की सक्रिय कूटनीति और वैकल्पिक आपूर्ति स्रोतों की रणनीति के चलते देश में ईंधन की उपलब्धता बनी हुई है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, हाल के सप्ताहों में कच्चे तेल, एलपीजी और एलएनजी की सप्लाई में सुधार दर्ज किया गया है, जिससे घरेलू स्तर पर राहत मिली है।

अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाकर होर्मुज पर निर्भरता कम करने की कोशिश

अधिकारियों का कहना है कि भारत ने अपनी ऊर्जा निर्भरता को कम करने के लिए आपूर्ति स्रोतों का विविधीकरण किया है। खासकर अफ्रीकी देशों से आयात बढ़ाकर होर्मुज रूट पर निर्भरता को कम करने की कोशिश की गई है। सुजाता शर्मा ने जानकारी दी कि ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति एक महीने पहले की तुलना में अब काफी बेहतर है और सप्लाई चेन को स्थिर रखने के प्रयास सफल हो रहे हैं। भारत रोजाना लगभग 5.5 से 5.6 मिलियन बैरल कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें से पहले एक बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट और होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता था। वहीं एलपीजी की सालाना मांग करीब 31 मिलियन टन है, जिसमें लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भरता है। प्राकृतिक गैस की खपत भी तेजी से बढ़ रही है, जिसमें आयात का बड़ा हिस्सा पहले मिडिल ईस्ट से आता था।

सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए कई देशों से बढ़ाया गया संपर्क

हालांकि अब भारत ने सप्लाई को संतुलित करने के लिए अमेरिका, रूस, कनाडा, नॉर्वे और पश्चिम अफ्रीकी देशों जैसे नाइजीरिया, अल्जीरिया, घाना, कांगो और अंगोला से संपर्क बढ़ाया है। इसके साथ ही कैमरून, इक्वेटोरियल गिनी और मोज़ाम्बिक जैसे देशों से एलएनजी सप्लाई पर भी ध्यान दिया जा रहा है। इससे भारत को वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है। इसके अलावा सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात अपनी कुछ आपूर्ति उन पाइपलाइनों के माध्यम से भेज रहे हैं, जो होर्मुज को बाईपास करती हैं। इनमें सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट (यानबू) पाइपलाइन और यूएई की हबशान-फुजैराह पाइपलाइन शामिल हैं। इन विकल्पों के चलते समुद्री मार्ग पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *