KNEWS DESK- भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 साल के लंबे इंतजार के बाद फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर औपचारिक रूप से मुहर लग गई है। दोनों पक्षों ने इस डील का आधिकारिक ऐलान कर दिया है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मदर ऑफ ऑल डील’ करार दिया है। इस समझौते के तहत टैरिफ में बड़ी कटौती और कई उत्पादों पर शुल्क पूरी तरह खत्म करने पर सहमति बनी है।
यूरोपीय संघ का कहना है कि इस डील से भारतीय बाजार में उसके निर्यात में बड़ा इजाफा होगा और दोनों पक्षों के आर्थिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे। वहीं भारत को भी इस समझौते से निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार सृजन का बड़ा अवसर मिलेगा। इस डील से भारत और यूरोप, दोनों की चीन और अमेरिका पर निर्भरता कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
यूरोपीय संघ के अनुमान के मुताबिक, इस समझौते के चलते 2032 तक भारत को EU का निर्यात दोगुना हो सकता है। इसके साथ ही भारत में लाखों लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और MSME कारोबार को इससे विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस डील के बाद आम उपभोक्ताओं के लिए भी राहत की खबर है, क्योंकि कई आयातित उत्पाद सस्ते हो सकते हैं। कारों से लेकर केमिकल्स, शराब और खाद्य उत्पादों तक के दामों में कटौती की संभावना है।
भारत–EU फ्री ट्रेड डील के बाद कार, कमर्शियल व्हीकल, मशीनरी, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, एयरोस्पेस, शराब और प्रोसेस्ड फूड जैसे सेक्टर्स में कीमतें कम हो सकती हैं। बीयर, वाइन और अन्य ड्रिंक्स से जुड़े उत्पाद भी पहले की तुलना में सस्ते मिलने की संभावना है।
इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ के निर्यातकों को हर साल करीब 4 अरब यूरो की टैरिफ बचत होगी। बीयर पर टैरिफ घटाकर 50 प्रतिशत किया गया है, जबकि शराब पर 40 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। कार और कमर्शियल वाहनों पर लगने वाला 110 प्रतिशत तक का टैरिफ घटाकर 10 प्रतिशत किया जाएगा, हालांकि इसके लिए सालाना 2.5 लाख वाहनों का कोटा तय किया गया है।
जैतून के तेल, मार्जरीन और वनस्पति तेलों पर शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। फलों के रस और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स पर लगने वाला टैरिफ भी समाप्त किया जाएगा। इसके अलावा यूरोपीय संघ के लगभग सभी रासायनिक उत्पादों पर शुल्क हटाने का फैसला किया गया है।
मशीनरी पर लगने वाले 44 प्रतिशत तक के टैरिफ और केमिकल्स पर 22 प्रतिशत तक के शुल्क को काफी हद तक समाप्त किया जाएगा। दवाओं और मेडिकल उत्पादों पर 11 प्रतिशत तक के टैरिफ में भी बड़ी कटौती की गई है। एयरक्राफ्ट और स्पेसक्राफ्ट पर लगने वाला टैरिफ पूरी तरह शून्य कर दिया गया है।
इस डील के तहत यूरोपीय संघ ने अगले दो वर्षों में भारत को ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती के लिए 500 मिलियन यूरो की सहायता देने का भी ऐलान किया है। साथ ही EU के ट्रेडमार्क, डिजाइन, कॉपीराइट और व्यापारिक रहस्यों को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाएगी।
फ्री ट्रेड डील से छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) को भी बड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है। नए व्यापारिक अवसर खुलेंगे, विदेशी निवेश बढ़ेगा और भारत वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत भूमिका निभा सकेगा।
कुल मिलाकर, भारत–यूरोपीय संघ फ्री ट्रेड डील को आर्थिक विकास, रोजगार और वैश्विक व्यापार संतुलन की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में साफ तौर पर देखने को मिलेगा।