KNEWS DESK – दिल्ली के कथित आबकारी घोटाले से जुड़े मामले में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से खुद को मामले से अलग (रिक्यूजल) करने की मांग की है। यह याचिका उस मामले से जुड़ी है, जिसमें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी है।
कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से जज और न्यायपालिका का सम्मान करते हैं, लेकिन उनके मन में कुछ संदेह हैं। उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के सामने रिक्यूजल की 10 वजहें भी रखीं।
इस पर जस्टिस ने जवाब दिया कि वह भी केजरीवाल का सम्मान करती हैं, लेकिन मामले की सुनवाई कानून के दायरे में ही होगी।
केजरीवाल की 10 बड़ी आपत्तियां
केजरीवाल ने अपनी दलील में कई गंभीर बिंदु उठाए|
- आरोपियों को सुने बिना सेशन कोर्ट के आदेश को गलत ठहराया गया
- प्रवर्तन निदेशालय के केस न होने के बावजूद स्टे दिया गया
- CBI के जांच अधिकारी द्वारा केस दाखिल न करने के बावजूद कार्रवाई पर रोक
- जवाब दाखिल करने के लिए सिर्फ एक हफ्ते का समय, जबकि अन्य मामलों में महीनों का समय दिया जाता है
- बेल सुनवाई के दौरान पहले से दोषी ठहराने जैसी टिप्पणियां
- केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा कोर्ट आदेश की पूर्व जानकारी का दावा
- जज के कुछ संगठनों से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने को लेकर सवाल
- CBI और ED की दलीलों को प्राथमिकता देने का आरोप
- सोशल मीडिया के हवाले से निष्पक्षता पर सवाल
- पिछले मामलों में भी कोर्ट की टिप्पणियों को बाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने का जिक्र
निष्पक्ष सुनवाई पर उठे सवाल
अरविंद केजरीवाल ने यह भी कहा कि निष्पक्ष न्याय के लिए यह जरूरी है कि किसी भी तरह का संदेह न रहे। उन्होंने दलील दी कि अगर किसी जज के फैसलों या संबंधों पर सवाल उठते हैं, तो उन्हें खुद को सुनवाई से अलग कर लेना चाहिए।