दिल्ली में घर बनाना हुआ आसान: 25% IFC भुगतान पर NOC, जल बोर्ड के फैसले से लाखों दिल्ली वासियों को राहत

डिजिटल डेस्क- राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में आम उपभोक्ताओं और बिल्डर्स के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली जल बोर्ड ने इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (IFC) से जुड़ी नीति में बड़ा बदलाव करते हुए एक व्यावहारिक सुधार को मंजूरी दी है। इस फैसले से उन लाखों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके निर्माण और पुनर्विकास प्रोजेक्ट्स ऊंचे IFC शुल्क के कारण लंबे समय से अटके हुए थे। नई नीति के तहत अब उपभोक्ता और डेवलपर्स को बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के समय कुल IFC का केवल 25 प्रतिशत भुगतान करना होगा। इस भुगतान के आधार पर उन्हें प्रोविजनल NOC (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) मिल जाएगी, जिससे वे अपने निर्माण कार्य को शुरू कर सकेंगे। बाकी 75 प्रतिशत राशि बाद में, पानी के कनेक्शन की अंतिम स्वीकृति के समय लागू दरों के अनुसार समायोजित की जाएगी।

आईएफसी के चलते नहीं बना पा रहे थे घर

इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह IFC की बढ़ती दरें रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में IFC की गणना प्रणाली ऑक्यूपेंसी आधारित मॉडल से बदलकर फ्लोर एरिया आधारित मॉडल कर दी गई थी, जिससे शुल्क में 5 से 10 गुना तक बढ़ोतरी हो गई थी। इसका सीधा असर आम लोगों और बिल्डर्स पर पड़ा, जिससे कई प्रोजेक्ट्स रुक गए और बिल्डिंग अप्रूवल की प्रक्रिया धीमी पड़ गई। इस फैसले को लेकर दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि बढ़े हुए IFC के कारण लोग अपना घर नहीं बना पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह फैसला एक मानवीय और व्यावहारिक दृष्टिकोण के तहत लिया गया है, ताकि लोगों को राहत मिल सके और सिस्टम अधिक प्रभावी बन सके।

रुके हुए प्रोजेक्ट्स को तुरंत मिलेगी मंजूरी

मंत्री ने आगे कहा कि सरकार अब ऐसी व्यवस्था बनाने पर काम कर रही है, जिसमें लोग सिस्टम के अनुसार संघर्ष करने के बजाय सिस्टम लोगों के अनुकूल हो। इस नई नीति से निर्माण कार्य जल्दी शुरू हो सकेगा और लोगों पर शुरुआती आर्थिक बोझ भी कम होगा। इस फैसले के कई महत्वपूर्ण फायदे बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा लाभ यह है कि रुके हुए प्रोजेक्ट्स को तुरंत मंजूरी मिल सकेगी और निर्माण कार्य में तेजी आएगी। साथ ही, शुरुआती भुगतान कम होने से लोगों पर आर्थिक दबाव घटेगा। इसके अलावा, सिस्टम में पारदर्शिता और लचीलापन भी बढ़ेगा।

200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियों को रखा गया मुक्त

अतिरिक्त राहत के तौर पर 200 वर्ग मीटर तक की संपत्तियों को IFC से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। वहीं, बड़े प्लॉट्स के लिए भी संशोधित और तर्कसंगत शुल्क ढांचा लागू किया जाएगा। अनुमान है कि इस नए सिस्टम से कई मामलों में कुल IFC देनदारी 50 से 70 प्रतिशत तक कम हो सकती है। प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि यह सुधार नरेंद्र मोदी के ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के विजन के अनुरूप है। सरकार का लक्ष्य प्रक्रियाओं को सरल बनाना और लोगों को बिना बाधा के आगे बढ़ने में मदद करना है।

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