अंतरिक्ष में अदम्य साहस के लिए ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से किया जाएगा सम्मानित, अशोक चक्र के लिए भेजा गया नाम

डिजिटल डेस्क- अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर जाने वाले पहले भारतीय ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को उनके ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन के लिए देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार, अशोक चक्र, प्रदान किया जाएगा। यह ऐलान सरकार ने 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले किया। शुभांशु शुक्ला को उनके अदम्य साहस, सूझबूझ और मिशन के दौरान निभाई गई जिम्मेदारियों के लिए यह सम्मान दिया जाएगा। शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन (Axiom-4 Mission) के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी। इस मिशन में उन्होंने तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ हिस्सा लिया और 25 जून 2025 को उड़ान भरी थी। पृथ्वी पर लौटने की तारीख 14 जुलाई 2025 थी, यानी उन्होंने अंतरिक्ष में करीब 20 दिन बिताए। इस दौरान उन्होंने 60 से अधिक प्रयोग किए, जो जैवचिकित्सा विज्ञान, तंत्रिका विज्ञान, कृषि, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और उन्नत सामग्री विज्ञान जैसे विविध क्षेत्रों में किए गए।

राकेश शर्मा के बाद दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं शुभांशु शुक्ला

मिशन के दौरान शुभांशु ने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया। ISS पर माइक्रोग्रैविटी, मानव शरीर विज्ञान और उन्नत सामग्री विज्ञान से जुड़े जटिल प्रयोगों के बावजूद उन्होंने अडिग साहस और पूर्ण समर्पण के साथ सभी कार्य सफलतापूर्वक पूरे किए। उनकी सूझबूझ और धैर्य ने मिशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। यही कारण है कि उन्हें अशोक चक्र के लिए अनुशंसित किया गया। शुभांशु शुक्ला भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में विंग कमांडर राकेश शर्मा के बाद दूसरे अंतरिक्ष यात्री हैं। उन्होंने अपने मिशन के दौरान न केवल भारत का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित किया, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नए आयाम भी स्थापित किए। उनके द्वारा किए गए प्रयोग वैज्ञानिक शोध और तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।

आज के युवाओं के प्रेरणा स्रोत है शुभांशु

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने मिशन के दौरान न केवल तकनीकी चुनौतियों को पार किया, बल्कि टीम के साथ उत्कृष्ट सहयोग और नेतृत्व कौशल का भी प्रदर्शन किया। उनके साहस और समर्पण ने दिखाया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान और प्रयोगों में विश्व स्तरीय गुणवत्ता की क्षमता है। गणतंत्र दिवस पर अशोक चक्र से सम्मानित होने के बाद शुभांशु शुक्ला भारतीय नागरिकों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन जाएंगे। उनके इस सम्मान से यह संदेश मिलेगा कि देश के नाम को अंतरराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित करना किसी भी चुनौती से बड़ा नहीं है।

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