डिजिटल डेस्क- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीजफायर ऐलान ने ग्लोबल मार्केट में बड़ा उलटफेर कर दिया है। ट्रंप ने कहा कि वह पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ दो हफ्तों के लिए संघर्षविराम के लिए तैयार हैं, जिस परईरान और इजराइल ने भी सहमति जता दी है। मिडिल ईस्ट में पिछले छह हफ्तों से जारी तनाव के बीच यह खबर आते ही कमोडिटी बाजार में तेज हलचल देखने को मिली। सीजफायर की खबर का सबसे बड़ा असर सोने की कीमतों पर पड़ा। निवेशकों ने अनिश्चितता के माहौल में एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का रुख किया, जिससे इसकी कीमत में तेज उछाल आया। सोना करीब 1.6% बढ़कर लगभग 4,780 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया। इससे पहले भी पिछले सत्र में 1.2% की तेजी दर्ज की गई थी। वहीं, स्पॉट गोल्ड 1.4% बढ़कर 4,770.50 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। चांदी की कीमतों में भी 2.6% की तेजी आई और यह 74.90 डॉलर तक पहुंच गई। प्लेटिनम और पैलेडियम में भी मजबूती देखी गई।
तनाव के बाद से 10 प्रतिशत तक गिरावट देखी गई
हालांकि, यह भी ध्यान देने वाली बात है कि फरवरी के अंत में जब क्षेत्र में तनाव शुरू हुआ था, तब से अब तक सोने की कीमतों में लगभग 10% की गिरावट भी आई थी। कई निवेशकों ने अन्य बाजारों में हुए नुकसान की भरपाई के लिए सोना बेचा, जिससे इसकी ‘सेफ हेवन’ छवि पर कुछ असर पड़ा था। लेकिन अब सीजफायर की खबर ने एक बार फिर सोने में भरोसा लौटाया है। दूसरी ओर, कच्चे तेल के बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सीजफायर की घोषणा के बाद ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट आई। ब्रेंट क्रूड करीब 21 डॉलर प्रति बैरल तक टूट गया, जबकि अमेरिकी कच्चा तेल लगभग 19 डॉलर गिर गया। WTI क्रूड की कीमतें कारोबार के दौरान करीब 19% गिरकर 91.11 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं, जो एक दिन पहले 112.41 डॉलर पर बंद हुई थीं। इससे पहले तनाव के चलते तेल की कीमतें 116 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थीं।
डॉलर इंडेक्स भी 0.3 प्रतिशत गिरा
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने से सप्लाई बाधित होने का खतरा घटा है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बना है। वहीं, डॉलर इंडेक्स में 0.3% की गिरावट भी दर्ज की गई, जिसने सोने की कीमतों को और सहारा दिया। बॉन्ड मार्केट के जानकारों के अनुसार, अमेरिकी केंद्रीय बैंक Federal Reserve फिलहाल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। हालांकि, अगर महंगाई का दबाव बढ़ता है तो दरों में बढ़ोतरी भी संभव है। यह स्थिति सोने के लिए थोड़ी नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि सोने पर कोई ब्याज नहीं मिलता।