डिजिटल डेस्क- पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को सोमवार को नई दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में भर्ती कराया गया है। बीते सप्ताह दो बार बेहोशी की घटनाओं के बाद डॉक्टरों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कर विस्तृत चिकित्सीय जांच और एमआरआई कराने की सलाह दी थी। अधिकारियों के अनुसार, फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर बनी हुई है और विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज चल रहा है। सूत्रों के मुताबिक, 10 जनवरी को जगदीप धनखड़ को उस समय दो बार बेहोशी का अनुभव हुआ, जब वे शौचालय गए थे। अचानक चक्कर आने और चेतना खोने की स्थिति के बाद उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता की आवश्यकता महसूस हुई। इसके बाद सोमवार को वे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के लिए AIIMS पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उनकी उम्र और स्वास्थ्य इतिहास को देखते हुए अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी।
उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए कई बार हो चुके अस्वस्थ
धनखड़ का स्वास्थ्य पिछले कुछ वर्षों से लगातार चर्चा में रहा है। उपराष्ट्रपति पद पर रहते हुए भी वे कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान अस्वस्थ हो चुके हैं। रण ऑफ कच्छ, उत्तराखंड, केरल और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान उनके बेहोश होने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद अक्सर उनके स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठते रहे हैं। पूर्व उपराष्ट्रपति ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उस समय भी उनके लगातार अस्वस्थ रहने और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सीमित भागीदारी को इसकी वजह माना गया था। इस्तीफे के बाद वे सार्वजनिक जीवन से काफी हद तक दूरी बनाए हुए हैं।
कार्डियोलॉजिकल टेस्ट और न्यूरोलॉजिकल टेस्ट समेत कई टेस्ट किए गए
AIIMS में भर्ती होने के बाद धनखड़ की ब्लड जांच, कार्डियोलॉजिकल टेस्ट और न्यूरोलॉजिकल परीक्षण किए जा रहे हैं। डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रखे हुए है। एमआरआई के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि बेहोशी की घटनाओं के पीछे कोई न्यूरोलॉजिकल या अन्य गंभीर कारण तो नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल घबराने की कोई बात नहीं है और सभी जांचें एहतियात के तौर पर कराई जा रही हैं। डॉक्टरों का मानना है कि समय पर जांच और सही इलाज से स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता है। जगदीप धनखड़ भारतीय राजनीति में एक लंबा अनुभव रखने वाले नेता रहे हैं। वे पश्चिम बंगाल के राज्यपाल और बाद में देश के उपराष्ट्रपति के पद पर रह चुके हैं। ऐसे में उनके स्वास्थ्य को लेकर न सिर्फ राजनीतिक गलियारों में, बल्कि आम लोगों के बीच भी चिंता देखी जा रही है।