KNEWS DESK – उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक बदलाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा सियासी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। सोमवार को सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से करीब 50 मिनट तक बंद कमरे में मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी के हाथ में टैबलेट और सीएम योगी के पास फाइल देखी गई, जिसके बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि यूपी कैबिनेट विस्तार को लेकर दोनों नेताओं के बीच अहम बातचीत हुई है।
कैबिनेट विस्तार पर हुई अहम मंत्रणा
सूत्रों के मुताबिक, इस संभावित कैबिनेट रीशफल में उन नेताओं को प्राथमिकता दी जा सकती है, जो जमीनी स्तर पर सक्रिय रहे हैं और संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभा सकते हैं। इतना ही नहीं, कुछ राज्य मंत्रियों को प्रमोशन दिए जाने की भी संभावना जताई जा रही है। सीएम योगी का यह दौरा इसी लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बीजेपी मुख्यालय जाकर पार्टी के नवनियुक्त कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मिलने का भी कार्यक्रम है। माना जा रहा है कि इस बैठक में प्रदेश संगठन में नियुक्तियों, आगामी चुनावों की रणनीति और विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
डिप्टी सीएम भी दिल्ली में मौजूद
सीएम योगी के दिल्ली दौरे के साथ ही डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी राजधानी में मौजूद हैं। तीनों शीर्ष नेताओं की एक साथ मौजूदगी ने मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं को और तेज कर दिया है। गौरतलब है कि यूपी मंत्रिमंडल में इस समय 54 मंत्री हैं, जबकि अधिकतम संख्या 60 हो सकती है। ऐसे में 6 नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की पूरी गुंजाइश है।
सूत्रों की मानें तो इस बार कैबिनेट विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश की जाएगी। खास तौर पर वेस्ट यूपी से तीन नए मंत्रियों को जगह मिलने की चर्चा है, जिनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। वहीं, कुछ मौजूदा मंत्रियों को संगठन में अहम जिम्मेदारी देकर सरकार से संगठन में शिफ्ट किया जा सकता है।
संगठन में भी हो सकता है बड़ा फेरबदल
प्रदेश में पंकज चौधरी के नए प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही बीजेपी संगठन में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि वह जल्द ही अपनी नई टीम का गठन कर सकते हैं। इसके तहत कुछ मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। 2027 विधानसभा चुनाव और इसी साल होने वाले पंचायत चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर सक्रिय नेताओं को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है।