डिजिटल डेस्क- भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर गुरुवार से शुक्रवार तक फ्रांस के अहम दौरे पर रहेंगे, जहां वह G7 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। यह दौरा वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें दुनिया के कई ज्वलंत मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने वाली है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, जयशंकर यह दौरा फ्रांस के यूरोप और विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल बैरोट के निमंत्रण पर कर रहे हैं। इस दौरान वह G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के साथ-साथ विभिन्न देशों के अपने समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे।
यूक्रेन युद्ध, समुद्री सुरक्षा समेत कई विषयों पर होगी महत्वपूर्ण चर्चा
फ्रांस के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी पृष्ठभूमि ब्रीफिंग के अनुसार, इस बैठक में यूक्रेन युद्ध, उसके पुनर्निर्माण प्रयास, समुद्री सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक शासन में सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। खास तौर पर यूक्रेन संकट को लेकर अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें पुनर्निर्माण, सुरक्षा और मानवीय सहायता पर फोकस रहेगा। फ्रांस के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पास्कल कॉन्फावरेक्स ने बैठक के एजेंडे की जानकारी देते हुए कहा कि यह बैठक संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान हुई अनौपचारिक मंत्रिस्तरीय बैठक के तुरंत बाद हो रही है और G7 नेताओं के आगामी शिखर सम्मेलन की तैयारी के रूप में काम करेगी। उन्होंने बताया कि यह प्रक्रिया 13 से 15 जून के बीच होने वाले शिखर सम्मेलन के लिए आधार तैयार करेगी।
सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने के लिए होगी विशेष चर्चा
बैठक में परमाणु सुरक्षा, बारूदी सुरंगों को हटाने के प्रयास और युद्ध प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए फंडिंग जैसे मुद्दों पर भी विचार किया जाएगा। इस दौरान यूरोपीय पुनर्निर्माण और विकास बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं की भूमिका पर भी चर्चा होगी, खासकर यूक्रेन के पुनर्निर्माण के लिए निवेश जुटाने को लेकर। समुद्री सुरक्षा भी इस बैठक का एक अहम एजेंडा है। इसमें समुद्री मार्गों की सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित रखने जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा नशीले पदार्थों की तस्करी और महत्वपूर्ण खनिजों से जुड़े खतरों पर भी विचार-विमर्श होगा।
कई देशों को किया गया आमंत्रित
इस बैठक की एक खास बात यह भी है कि इसमें G7 देशों के अलावा भारत, दक्षिण कोरिया, सऊदी अरब, ब्राजील और यूक्रेन जैसे गैर-G7 साझेदार देशों को भी आमंत्रित किया गया है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि वैश्विक मुद्दों पर व्यापक सहयोग और संवाद को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। गुरुवार को ज्यादातर सत्र आयोजित किए जाएंगे, जबकि एक अहम सत्र शुक्रवार सुबह होगा। इसके अलावा कई कार्य भोज (वर्किंग डिनर) और अन्य कार्यक्रम भी रखे गए हैं, जिनके जरिए गहन चर्चा और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।