रियल एस्टेट घोटाला में ED की बड़ी कार्रवाई, गुरुग्राम के Ansal Hub-83 प्रोजेक्ट की 82 करोड़ की संपत्ति अटैच

KNEWS DESK – Enforcement Directorate के गुरुग्राम जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में कड़ा कदम उठाते हुए करीब 82 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। यह कार्रवाई गुरुग्राम के सेक्टर-83 स्थित Ansal Hub-83 कमर्शियल प्रोजेक्ट से जुड़े कथित रियल एस्टेट घोटाले में की गई है।

करीब 2.47 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में 147 दुकानें, 137 ऑफिस स्पेस और 2 रेस्टोरेंट यूनिट्स शामिल हैं। लेकिन लंबे समय से निवेशकों को न तो कब्जा मिला और न ही प्रोजेक्ट पूरा हुआ, जिससे मामला गंभीर होता चला गया।

FIR के आधार पर शुरू हुई जांच

इस केस की जांच जून 2023 में दर्ज FIR के बाद शुरू हुई, जिसे हरियाणा पुलिस ने दर्ज किया था। शिकायत में अंसल हाउसिंग लिमिटेड (पूर्व में अंसल हाउसिंग एंड कंस्ट्रक्शन लिमिटेड) के प्रमोटरों और वरिष्ठ अधिकारियों पर साजिश और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए।

आरोपों के घेरे में कंपनी के होलटाइम डायरेक्टर कुशाग्र अंसल के साथ सम्यक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और आकांक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड जैसी संबद्ध कंपनियां भी शामिल हैं।

यह शिकायत HUB-83 आवंटी कल्याण संघ की ओर से की गई थी, जो 1000 से अधिक निवेशकों का प्रतिनिधित्व करता है। इन निवेशकों ने अपनी जमा-पूंजी इस प्रोजेक्ट में लगाई थी।

जांच में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं

ईडी की पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए

  • जरूरी सरकारी मंजूरियां मिलने से पहले ही यूनिट्स की बिक्री शुरू कर दी गई।
  • दिसंबर 2015 में लाइसेंस समाप्त होने के बाद भी उसे रिन्यू नहीं कराया गया, फिर भी सितंबर 2023 तक निवेशकों से रकम ली जाती रही।
  • निवेशकों को समय पर कब्जा और आधुनिक सुविधाओं का वादा किया गया, लेकिन करीब 15 साल बाद भी प्रोजेक्ट अधूरा है।
  • अब तक ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ और किसी को वैध कब्जा नहीं दिया गया।
  • आरोप है कि प्रोजेक्ट पर खर्च करने के बजाय निवेशकों की रकम को अन्य कार्यों और निजी लाभ में इस्तेमाल किया गया।

कई निवेशकों ने इस मामले में Haryana Real Estate Regulatory Authority (HRERA) में भी शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन समाधान नहीं मिलने पर मामला आगे बढ़ा।

जांच में खुलासा हुआ कि वर्ष 2011 से 2023 के बीच निवेशकों से 82 करोड़ रुपये से अधिक की राशि वसूली गई। आशंका है कि यदि संपत्तियां अटैच न की जातीं तो उन्हें बेचा या ट्रांसफर कर साक्ष्य प्रभावित किए जा सकते थे।