डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के अंतिम विधानसभा क्षेत्र दुद्धी से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह गोंड का गुरुवार को निधन हो गया। वे लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे और लखनऊ स्थित एसजीपीजीआई में उनका इलाज चल रहा था। बताया जा रहा है कि उनकी दोनों किडनियां खराब हो गई थीं। उनके निधन की खबर सामने आते ही राजनीतिक, सामाजिक और आदिवासी समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई। विजय सिंह गोंड आदिवासी राजनीति के एक मजबूत स्तंभ माने जाते थे और उन्हें आदिवासी समाज का ‘पितामह’ भी कहा जाता था। उनका जाना न सिर्फ समाजवादी पार्टी के लिए, बल्कि पूरे पूर्वांचल और आदिवासी समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 3160 वोटों से दी थी पराजय
विजय सिंह गोंड ने 2024 के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी श्रवण गोंड को 3160 मतों से हराकर दुद्धी सीट पर जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2022 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने रामदुलार गोड़ को 6297 मतों के बड़े अंतर से हराया था। दुद्धी विधानसभा (403) अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित और आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां विजय सिंह गोंड ने लगातार सात बार विधायक के रूप में जनता की सेवा की। उनका राजनीतिक सफर संघर्ष और समर्पण की मिसाल रहा। वर्ष 1979 में उन्होंने मात्र 200 रुपये मासिक मानदेय पर वनवासी सेवा आश्रम में काम करते हुए कांग्रेस के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1989 में अपने राजनीतिक गुरु रामप्यारे पनिका को हराकर उन्होंने आदिवासी राजनीति में नया अध्याय लिखा।
अलग-अलग दलों से 8 बार रहे हैं विधायक
विजय सिंह गोंड विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े रहे और आठवीं बार 2022 में विधायक बने थे। वे समाजवादी पार्टी की सरकार में मंत्री भी रह चुके थे। सदन के भीतर उन्होंने हमेशा आदिवासी समाज के अधिकारों, जल-जंगल-जमीन और शिक्षा जैसे मुद्दों को मजबूती से उठाया। दुद्धी और ओबरा विधानसभा क्षेत्रों को अनुसूचित जनजाति सीट घोषित कराने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी।