KNEWS DESK- Supreme Court of the United States ने राष्ट्रपति Donald Trump के वैश्विक टैरिफ पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि राष्ट्रीय आपातकाल संबंधी कानून का इस्तेमाल कर व्यापक आयात शुल्क लगाना संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टैरिफ लगाने की शक्ति अमेरिकी संविधान के तहत कांग्रेस को प्राप्त है, न कि राष्ट्रपति को।
यह मामला उस समय शुरू हुआ जब ट्रंप प्रशासन ने 1977 के International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत कई देशों से आयातित वस्तुओं पर बड़े पैमाने पर शुल्क लगा दिए। प्रशासन का तर्क था कि बढ़ता व्यापार घाटा अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा है, इसलिए इसे “राष्ट्रीय आपातकाल” घोषित करना आवश्यक था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि IEEPA का उद्देश्य मुख्य रूप से आर्थिक प्रतिबंध (सैंक्शन) और संपत्तियों को फ्रीज़ करने जैसे कदमों तक सीमित है। इस कानून के तहत व्यापक टैरिफ लगाना उसके मूल आशय से परे है।
पिछले वर्ष 5 नवंबर को हुई सुनवाई के दौरान अदालत के रूढ़िवादी और उदारवादी—दोनों खेमों के न्यायाधीशों ने सरकार से पूछा कि क्या व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल की श्रेणी में रखा जा सकता है। न्यायाधीशों ने इस तर्क पर संदेह जताया कि लंबे समय से जारी व्यापार असंतुलन अचानक आपात स्थिति कैसे बन सकता है।ट्रंप प्रशासन ने अप्रैल 2025 में व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते हुए लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों पर जवाबी टैरिफ लगाए थे। इनमें चीन, कनाडा और मेक्सिको प्रमुख थे। प्रशासन ने फेंटानिल और अन्य अवैध दवाओं की तस्करी को भी आपातकालीन आधार बताया।
इन टैरिफ से प्रभावित कई अमेरिकी कंपनियों और 12 राज्यों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। उनका कहना था कि IEEPA में स्पष्ट रूप से टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं दी गई है और यह अधिकार केवल कांग्रेस को है। निचली अदालतों ने भी माना कि राष्ट्रपति ने आपातकालीन शक्तियों का अत्यधिक विस्तार किया।
अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट में तीन रूढ़िवादी न्यायाधीश नियुक्त किए थे, जिससे अदालत की वैचारिक दिशा में बदलाव आया था। इसके बावजूद, इस मामले में अदालत ने कार्यपालिका की शक्तियों की सीमा तय करते हुए स्पष्ट संकेत दिया कि आपातकालीन अधिकारों का प्रयोग असीमित नहीं हो सकता।
यह फैसला न केवल ट्रंप की आर्थिक नीतियों के लिए झटका माना जा रहा है, बल्कि भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कानूनी मिसाल स्थापित करता है। अब यदि व्यापक टैरिफ लगाने हों, तो इसके लिए कांग्रेस की स्पष्ट स्वीकृति आवश्यक होगी।