डिजिटल डेस्क- डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख और सजायाफ्ता गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर 40 दिन की पैरोल मंजूर कर दी गई है। पैरोल मिलने के बाद वह रोहतक की सुनारिया जेल से बाहर आ सकेगा। राम रहीम के लिए जेल से बाहर आना कोई नई बात नहीं है, क्योंकि इससे पहले भी उसे कई बार पैरोल और फरलो की सुविधा मिल चुकी है। अगस्त 2025 में रक्षाबंधन से पहले भी राम रहीम को 40 दिन की पैरोल दी गई थी, जिस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर काफी सवाल उठे थे। गुरमीत राम रहीम डेरा सच्चा सौदा का प्रमुख है और उसके लाखों अनुयायी देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले हुए हैं। पैरोल की मंजूरी के बाद एक बार फिर यह मुद्दा चर्चा में आ गया है कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे कैदियों को बार-बार पैरोल दिया जाना कितना उचित है। प्रशासन की ओर से कहा जाता है कि पैरोल नियमों के तहत दी जाती है, जबकि विरोधियों का मानना है कि राम रहीम को विशेष रियायतें मिलती रही हैं।
यौन शोषण के मामले में 2017 में दिया गया था दोषी करार
गौरतलब है कि डेरा सच्चा सौदा की दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने अगस्त 2017 में गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिया था। अदालत ने उसे दोनों मामलों में अलग-अलग 10-10 साल की सजा सुनाई थी, यानी कुल 20 साल की कैद। इसके साथ ही कोर्ट ने राम रहीम पर 30 लाख 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सीबीआई के अनुसार, यौन शोषण की घटनाएं वर्ष 1999 की थीं, लेकिन पीड़िताओं के बयान वर्ष 2005 में दर्ज किए गए। जांच एजेंसी ने छह साल बाद इन बयानों को रिकॉर्ड किया था। कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़िताओं के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर राम रहीम को दोषी ठहराया गया।
पत्रकार रामचंद्र की हत्या का भी है दोषी
इसके अलावा, गुरमीत राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी सीबीआई कोर्ट ने दोषी माना और सजा सुनाई। रामचंद्र छत्रपति ने डेरा सच्चा सौदा से जुड़े कथित अपराधों को उजागर किया था, जिसके बाद उनकी हत्या कर दी गई थी। वहीं, डेरा मैनेजर रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी राम रहीम को सजा मिल चुकी है। फिलहाल गुरमीत राम रहीम इन सभी मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है और रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहा है। बावजूद इसके, उसे समय-समय पर पैरोल और फरलो मिलती रही है।