डिजिटल डेस्क- देश की राजधानी दिल्ली में इन दिनों वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। लगातार खराब होती एयर क्वालिटी के कारण लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कई बड़े और सख्त फैसलों का ऐलान किया है। सरकार का कहना है कि सख्ती के बिना प्रदूषण पर काबू पाना संभव नहीं है, इसलिए नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाएगा। बढ़ते प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए दिल्ली सरकार ने घोषणा की है कि कल से दिल्ली के सभी सरकारी और निजी संस्थानों में 50 प्रतिशत वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा। इसका मुख्य उद्देश्य सड़कों पर वाहनों की संख्या कम करना और प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है। हालांकि, हेल्थ केयर सेवाएं, अस्पताल, फायर सर्विस, जेल और सार्वजनिक परिवहन जैसी आवश्यक सेवाओं को इस नियम से छूट दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा।
रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन मजदूरों को मिलेंगे 10 हजार रूपए
इसके साथ ही दिल्ली सरकार ने ग्रेप-3 के दौरान काम बंद होने से प्रभावित पंजीकृत निर्माण मजदूरों को भी राहत देने का फैसला किया है। सरकार ग्रेप-3 की अवधि में बेरोजगार रहे रजिस्टर्ड कंस्ट्रक्शन मजदूरों को 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देगी। यह राशि सीधे मजदूरों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। सरकार के मुताबिक, ग्रेप-3 के तहत दिल्ली में करीब 16 दिनों तक निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रहा, जिससे हजारों मजदूरों की आजीविका प्रभावित हुई।इस पूरे मामले पर दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री कपिल मिश्रा ने मीडिया को जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस समय दिल्ली में ग्रेप-4 लागू है और हालात को देखते हुए श्रम विभाग ने कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि CAQM और पर्यावरण विभाग के निर्देशों के तहत 50 प्रतिशत अटेंडेंस और वर्क फ्रॉम होम का फैसला लिया गया है, जो कल से प्रभावी होगा।
13 वर्षों तक निकम्मा मुख्यमंत्री रहा- कपिल मिश्रा
इस दौरान कपिल मिश्रा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 13 वर्षों तक एक “निकम्मा मुख्यमंत्री” रहा, जिसने प्रदूषण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि आज का प्रदूषण पिछली सरकारों की देन है और इसके लिए अरविंद केजरीवाल तथा उनका भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। कपिल मिश्रा ने कहा कि अगर पहले सही समय पर काम किया गया होता, तो आज हालात इतने गंभीर नहीं होते। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर आते ही पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली छोड़कर चले जाते थे और पंजाब को दोष देते थे। कपिल मिश्रा के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।