KNEWS DESK- मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और यूएस-इज़राइल के ईरान पर हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 82.37 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI) भी 75.33 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो जून 2025 के बाद सबसे ऊँचा रिकॉर्ड है। आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड में 7 फीसदी का उछाल आया, जबकि WTI 6.95 फीसदी तक बढ़ा।
तेल की कीमतों में यह तेजी सीधे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा स्थिति और शिपमेंट पर असर के कारण आई। ईरान और इज़राइल के हमलों से टैंकर्स को नुकसान पहुंचा और होर्मुज जलडमरूमध्य में नेविगेशन प्रभावित हुआ। इस दौरान कम से कम तीन टैंकरों को निशाना बनाया गया और एक नाविक की मौत हुई। शिपिंग कंपनियों और देशों ने तेल आपूर्ति का पुनर्मूल्यांकन शुरू कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट की यह अस्थिरता जारी रहती है तो कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। ANZ के एनालिस्ट डेनियल हाइन्स ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में टैंकरों पर हमले से सप्लाई पर बड़ा खतरा है। सिटी के एनालिस्ट ने अनुमान लगाया कि इस हफ़्ते ब्रेंट 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के बीच ट्रेड करेगा।
OPEC+ ने अप्रैल के लिए प्रति दिन 206,000 बैरल उत्पादन बढ़ाने पर सहमति दी है, लेकिन सऊदी अरब को छोड़कर अन्य प्रोड्यूसर अपनी पूरी क्षमता पर उत्पादन कर रहे हैं। RBC कैपिटल की एनालिस्ट हेलिमा क्रॉफ्ट ने चेताया कि अगर मुख्य जलमार्ग बंद होते हैं तो अतिरिक्त तेल का इस्तेमाल सीमित हो जाएगा। शिपिंग डेटा के अनुसार पिछले 24 घंटों में 200 से अधिक टैंकर होर्मुज और आसपास के पानी में लंगर डाल चुके हैं।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखी है और मुख्य प्रोड्यूसर देशों और सरकारों के संपर्क में है। IEA की इमरजेंसी स्ट्रेटेजी के तहत विकसित देशों से पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) जारी करने में मदद की जा सकती है। गोल्डमैन सैक्स के एनालिस्ट ने बताया कि ग्लोबल टोटल तेल स्टॉक 7.827 मिलियन बैरल है, जो 74 दिनों की वैश्विक डिमांड को कवर करने के हिसाब से लगभग हिस्टोरिकल मीडियन के बराबर है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को फिलहाल कोई बड़ा असर नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार नहीं जातीं, तब तक घरेलू ईंधन के दाम स्थिर रहेंगे। भारत के पास पर्याप्त तेल रिजर्व है और रूस से कच्चा तेल मंगाने का विकल्प भी उपलब्ध है। अगर तेल $100 प्रति बैरल पार करता है तो पेट्रोल और डीजल में 3-5 रुपए तक इजाफा हो सकता है।