जनरल नरवणे की किताब पर संसद में बवाल, भाजपा ने वीडियो शेयर कर राहुल गांधी पर साधा निशाना

डिजिटल डेस्क- लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा के अंश पढ़े जाने के बाद संसद में सियासी तूफान खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली, जिसके चलते सदन की कार्यवाही तक रोकनी पड़ी। इसी बीच भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर राहुल गांधी पर पलटवार किया है। अमित मालवीय द्वारा शेयर किया गया यह वीडियो पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे का है, जिसमें वे सरकारी समाचार एजेंसी एएनआई को इंटरव्यू देते नजर आ रहे हैं। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे चीन को लेकर सवाल किया गया, तो नरवणे ने कहा कि दुनिया के कई देश मानते हैं कि चीन का सामना नहीं किया जा सकता, लेकिन भारत ने इस धारणा को गलत साबित किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने न सिर्फ चीन का सामना किया, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि दृढ़ इच्छाशक्ति और मजबूत नेतृत्व से ऐसा संभव है।

अमित मालवीय ने वीडियो शेयर कर राहुल को घेरा

इस वीडियो के कैप्शन में अमित मालवीय ने लिखा कि तत्कालीन सेना प्रमुख ने साफ कहा था कि “हमने दुनिया को दिखाया कि दबंग चीन का सामना किया जा सकता है।” उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सशस्त्र सेनाएं मजबूती से खड़ी रहीं, निर्णायक कार्रवाई की और यह स्पष्ट संदेश दिया कि ताकत, संकल्प और नेतृत्व ही असली मायने रखते हैं। माना जा रहा है कि इस वीडियो के जरिए बीजेपी राहुल गांधी के उस दावे को चुनौती दे रही है, जिसमें उन्होंने सरकार पर चीन के मुद्दे पर सच छिपाने का आरोप लगाया था। दरअसल, लोकसभा में राहुल गांधी ने जब जनरल नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देते हुए चीन और डोकलाम विवाद का जिक्र किया, तो स्पीकर ने इसकी अनुमति नहीं दी। इस पर हंगामा शुरू हो गया। राहुल गांधी ने कहा कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सब कुछ ठीक है तो सरकार को इन तथ्यों से डर क्यों लग रहा है।

थलसेना प्रमुख रहे हैं जनरल मनोज मुकुंद नरवणे

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे भारतीय थलसेना के 27वें प्रमुख रहे हैं। उन्होंने 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक सेना प्रमुख के रूप में सेवाएं दीं। उनके कार्यकाल में ही 2020 का गलवान घाटी संघर्ष हुआ था। इससे पहले वे डोकलाम संकट समेत कई अहम सैन्य अभियानों से जुड़े रहे। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने अनुभवों पर आधारित एक किताब लिखी, जो अब तक प्रकाशित नहीं हुई है। राहुल गांधी ने इसी किताब में लिखे कथित अंशों का हवाला देकर सरकार पर निशाना साधा है।

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