लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ कांग्रेस ने दिया अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस, 118 सांसदों के हैं हस्ताक्षर

KNEWS DESK- कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। पार्टी ने यह नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है, जिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।

कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, संसदीय लोकतंत्र की परंपरा में नेता प्रतिपक्ष द्वारा स्पीकर को हटाने से जुड़ी याचिका पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता। इसलिए राहुल गांधी ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी। यह प्रस्ताव लोकसभा नियम 94(सी) के तहत लाया गया है। लोकसभा सचिवालय ने पुष्टि की है कि नोटिस प्राप्त हो गया है और नियमों के अनुसार इसका आकलन कर आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा में विपक्षी नेताओं को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा है, जबकि सत्तापक्ष को खुली छूट मिल रही है। विशेष रूप से राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न मिलने और कांग्रेस की महिला सांसदों के साथ हुई कथित अनुचित स्थिति को लेकर विपक्ष ने स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

इस मुद्दे पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव लाने से कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि विपक्ष के पास पर्याप्त संख्या नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसदों ने स्पीकर के पद का अपमान किया और अधिकारियों की टेबल पर चढ़कर हंगामा किया। रिजिजू ने कहा कि सरकार चाहती तो स्पीकर से कार्रवाई की मांग कर सकती थी, लेकिन वह किसी विशेष कार्रवाई की सिफारिश नहीं कर रहे हैं।

अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले आज सुबह संसद परिसर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कक्ष में विपक्षी दलों की बैठक हुई। इस बैठक में तृणमूल कांग्रेस, वाम दल, डीएमके, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, शिवसेना (यूबीटी) और एनसीपी (शरद पवार गुट) सहित कई दलों के नेता शामिल हुए।

भारतीय संसदीय इतिहास में अब तक तीन बार लोकसभा स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव लाया जा चुका है।

1954 में सोशलिस्ट सांसद विग्नेश्वर मिसिर ने स्पीकर जी.वी. मावलंकर पर पक्षपात का आरोप लगाया था, लेकिन प्रस्ताव खारिज हो गया।

1966 में मधु लिमये ने स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया, जो पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण गिर गया।

1987 में सोमनाथ चटर्जी ने स्पीकर बलराम जाखड़ के खिलाफ प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने खारिज कर दिया।

संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा स्पीकर को हटाने के लिए कम से कम 14 दिन का नोटिस और सदन में बहुमत से पारित होना आवश्यक होता है।

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