डिजिटल डेस्क- केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए यह साफ संदेश दिया है कि सरकार की प्राथमिकता तात्कालिक लोकप्रिय फैसलों से ज्यादा लॉन्ग टर्म ग्रोथ और स्ट्रक्चरल मजबूती है। बजट का फोकस उपभोग बढ़ाने से ज्यादा उत्पादक क्षेत्रों, निवेश और सुधारों की निरंतरता पर रहा। सरकार का दावा है कि बीते वर्षों में नीतिगत स्थिरता और अनुशासन की वजह से भारत ने 7% से ज्यादा की आर्थिक वृद्धि हासिल की है और आने वाले वर्षों में भी यह रफ्तार बनी रहेगी। बजट 2026 खुद को युवा शक्ति आधारित बताता है, जिसमें गरीबों पर फोकस, प्रोडक्टिविटी बढ़ाने के प्रयास और सुधारों की स्पष्ट झलक दिखती है। इस बजट में 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट भी पेश की गई, जिससे केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संतुलन का रोडमैप सामने आया है।
अर्थव्यवस्था और फिस्कल हेल्थ के साथ कोई समझौता नहीं
सरकार ने इस बजट के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि तेज़ आर्थिक विकास के बावजूद फिस्कल डिसिप्लिन से कोई समझौता नहीं होगा। 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के बाद राज्यों को करीब 1.4 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त मिलने का रास्ता साफ हुआ है, जिसे संघीय ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार का अनुमान है कि FY26 में Debt-to-GDP रेश्यो 56.1% रहेगा, जो FY27 में घटकर 55.6% हो सकता है। इसी तरह FY26 में वित्तीय घाटा GDP का 4.4% रहने का अनुमान है, जबकि FY27 में इसे 4.3% तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि सरकार FY27 में करीब 11.7 लाख करोड़ रुपये की उधारी लेगी, लेकिन उसका दावा है कि यह उधारी ग्रोथ-सपोर्टिंग कैपेक्स के लिए होगी।
इंफ्रास्ट्रक्चर: ग्रोथ का इंजन
बजट 2026 में इंफ्रास्ट्रक्चर को एक बार फिर विकास का सबसे बड़ा इंजन बताया गया है। FY27 के लिए सरकार ने करीब 12.2 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रस्ताव रखा है। इसका बड़ा हिस्सा सड़कों, रेलवे, लॉजिस्टिक्स और शहरी ढांचे में जाएगा। इंफ्रा रिस्क गारंटी फंड का प्रस्ताव इसलिए अहम है क्योंकि इससे बड़े प्रोजेक्ट्स में निजी निवेश का जोखिम कम होगा। अगले पांच साल में 20 नए वॉटरवेज विकसित करने, सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने और नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तैयार करने की योजनाएं लॉजिस्टिक्स कॉस्ट घटाने और सप्लाई चेन मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही हैं। वाराणसी और पटना में शिप रिपेयर इकोसिस्टम विकसित करने और सी-प्लेन निर्माण के लिए इंसेंटिव देने से इनलैंड और रीजनल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही कार्बन कैप्चर योजना के लिए 20,000 करोड़ रुपये का आवंटन सरकार के ग्रीन ट्रांजिशन फोकस को दिखाता है।
मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्री: आत्मनिर्भर भारत का अगला चरण
बजट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आत्मनिर्भर भारत के अगले चरण के तौर पर पेश किया गया है। सरकार सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ISM 2.0 लॉन्च करने जा रही है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स मैन्युफैक्चरिंग के लिए करीब 40,000 करोड़ रुपये का प्रस्ताव रखा गया है। रेयर अर्थ मैग्नेट कॉरिडोर, तीन नए केमिकल पार्क और कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग के लिए 10,000 करोड़ रुपये का आवंटन इंपोर्ट निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है। 200 इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को रिवाइव करने की घोषणा से रोजगार और इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।