KNEWS DESK – मध्यप्रदेश के Dabra में आयोजित नवग्रह शक्ति पीठ के प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान कथा के दूसरे दिन कथावाचक Dhirendra Krishna Shastri ने युवाओं और खासकर युवतियों को संबोधित करते हुए एक ऐसा बयान दिया, जिसने कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच चर्चा छेड़ दी।
तीन दिवसीय धार्मिक आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में शामिल शास्त्री ने 18 से 25 वर्ष की आयु को जीवन का सबसे निर्णायक दौर बताया। उन्होंने कहा कि यह उम्र दिशा तय करने की होती है, यदि इस समय युवा संभल जाए तो भविष्य मजबूत होता है, और यदि भटक जाए तो संभलना कठिन हो जाता है।
“दुर्गा बनो, काली बनो…” वाला बयान
कथा के दौरान उन्होंने युवतियों से आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की अपील की। इसी क्रम में उन्होंने कहा, “तुम दुर्गा बनो, तुम काली बनो, लेकिन कभी न बुर्के वाली बनो।” उनके इस कथन के बाद सभा में मौजूद लोगों के बीच फुसफुसाहट और चर्चा शुरू हो गई। हालांकि मंच से उन्होंने इसे शक्ति और आत्मविश्वास के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
बच्चों और युवाओं को क्या दी सीख?
बच्चों को संबोधित करते हुए शास्त्री ने कहा कि वे चाहे उन्हें मानें या न मानें, लेकिन अपने माता-पिता की बात जरूर मानें। उन्होंने संगत के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि गलत संगति जीवन की दिशा बदल सकती है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि किसी को बाहरी परिस्थितियां नहीं बिगाड़तीं, बल्कि व्यक्ति की अपनी कमजोरियां उसे भटकाती हैं। उन्होंने रामायण का संदर्भ देते हुए कहा कि राम के राज्य में रहकर मंथरा नहीं सुधरी और रावण के राज्य में रहकर विभीषण नहीं बिगड़े अर्थात चरित्र का निर्माण व्यक्ति स्वयं करता है।
कार्यक्रम में व्यापक चर्चा
नवग्रह शक्ति पीठ के प्रतिष्ठा महोत्सव में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। शास्त्री के संबोधन के बाद उनके विचारों को लेकर कार्यक्रम स्थल पर और सोशल मीडिया पर चर्चाएं तेज हो गईं। समर्थक इसे युवाओं को जागरूक करने वाला संदेश बता रहे हैं, तो कुछ लोग उनके बयान को लेकर अलग-अलग राय रख रहे हैं।