KNEWS DESK – महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी को हुए विमान हादसे ने राजनीतिक जगत को गमगीन कर दिया। डिप्टी सीएम अजित पवार समेत पायलट कैप्टन सुमित कपूर, को-पायलट शांभवी पाठक, फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली और पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर विदीप जाधव की इस दुर्घटना में मौत हो गई। लैंडिंग के प्रयास के दौरान दुर्भाग्यपूर्ण क्रैश हुआ, जिससे पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। अजित पवार का अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया जा रहा है। लेकिन सवाल उठता है—परिवार ने पारंपरिक श्मशान की बजाय इस संस्थान को क्यों चुना? आइए जानते हैं इस फैसले के पीछे की भावुक कहानी।
विद्या प्रतिष्ठान: पवार परिवार की विरासत और सोच का प्रतीक
बारामती का विद्या प्रतिष्ठान पवार परिवार के लिए केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि उनकी सामाजिक प्रतिबद्धता का जीवंत प्रतीक है। इसने ग्रामीण बारामती को शिक्षा के राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थापित किया है। यहां के छात्र न सिर्फ डिग्री हासिल करते हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता और आधुनिक कौशलों से लैस होकर उड़ान भरते हैं।
16 अक्टूबर 1972 को शरद पवार ने इसकी नींव रखी, जब बारामती पिछड़ेपन का पर्याय था। उनका विजन था—किसानों-मजदूरों के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम और बड़े शहरों जैसे अवसर दें। बंजर जमीन पर शुरू हुआ यह संस्थान आज इंजीनियरिंग, आईटी, मैनेजमेंट, बायोटेक्नोलॉजी जैसे कोर्सेज का हब है।
अजित पवार की अहम भूमिका: विस्तार और मजबूती
शरद पवार के सपने को अजित पवार ने आधुनिक आयाम दिया। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया, नए कॉलेज खोले और संसाधनों का लगातार सहयोग दिया। सरकारी मंजूरियां हो या फंडिंग—हर कदम पर उन्होंने इसे प्राथमिकता दी। शिक्षा को समाजोत्थान का सबसे बड़ा हथियार मानते हुए, विद्या प्रतिष्ठान उनकी ‘कर्मभूमि’ बन गया।
सुनैना पवार की कुशल देखरेख
अजित पवार की पत्नी सुनैना पवार ने संस्थान के दैनिक संचालन और शैक्षणिक माहौल को संभाला। उनकी सक्रियता ने इसे पारिवारिक जिम्मेदारी का रूप दिया।
आज विद्या प्रतिष्ठान के पूर्व छात्र महाराष्ट्र से आगे देश-विदेश में चमक रहे हैं। ग्रामीण बच्चों को तकनीक से जोड़ना इसकी सबसे बड़ी सफलता है। यही वजह है कि परिवार ने अजित पवार की विदाई इसी पवित्र धरती पर चुनी—जहां उनकी विरासत अमर रहेगी।