KNEWS DESK- बांग्लादेश में हालिया आम चुनाव के बाद देश की राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। Tarique Rahman ने प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर नया अध्याय शुरू किया है। करीब 35 साल बाद बांग्लादेश को एक पुरुष प्रधानमंत्री मिला है। हालांकि इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ ही महिला प्रतिनिधित्व के मामले में चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। नई सरकार की 49 सदस्यों वाली कैबिनेट में केवल 3 महिलाएं शामिल हैं, यानी महिला प्रतिनिधित्व महज 6 प्रतिशत रह गया।
महिला अधिकार संगठनों और राजनीतिक जानकारों ने इस गिरावट पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कैबिनेट स्तर पर महिलाओं की इतनी कम भागीदारी राजनीतिक सशक्तिकरण की दशकों की उपलब्धियों को कमजोर कर सकती है।
नई कैबिनेट में शामिल तीन महिलाओं में शामिल हैं-
अफरोजा खानम रीता (माणिकगंज-3) – नागरिक उड्डयन और पर्यटन मंत्री
शमा ओबैद इस्लाम (फरीदपुर-2) – विदेश राज्य मंत्री
फरजाना शरमीन पुतुल (नाटोर-1) – महिला एवं बाल मामलों तथा सामाजिक कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री
देश में महिलाओं की कुल आबादी लगभग आधी है, लेकिन शीर्ष स्तर पर उनका प्रतिनिधित्व इतनी कम दर पर रहना कई सवाल खड़े करता है।
पिछली तीन कैबिनेटों में महिलाओं की भागीदारी कुछ बेहतर रही थी-
2019– 47 सदस्यों में 4 महिलाएं (प्रधानमंत्री शेख हसीना सहित)
2014– 57 सदस्यों में 5 महिलाएं
2009– 31 सदस्यों में 5 महिलाएं (~16%)
उसी दौर में दीपू मोनी देश की पहली महिला विदेश मंत्री बनी थीं और सहारा खातून पहली महिला गृह मंत्री रहीं।