डिजिटल डेस्क- लोकसभा में बीते दिन हुए अभूतपूर्व हंगामे को लेकर सियासत तेज हो गई है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान भारी शोर-शराबे और नारेबाजी के चलते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में अपना भाषण नहीं दे सके। अब इस पूरे घटनाक्रम पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला का बड़ा बयान सामने आया है, जिसने सियासी विवाद को और हवा दे दी है। सदन में स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि हालात इतने तनावपूर्ण हो गए थे कि प्रधानमंत्री के साथ कुछ भी अप्रत्याशित हो सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि माहौल को देखते हुए उन्होंने स्वयं पीएम मोदी से सदन में न आने का आग्रह किया था।
सांसदों ने मर्यादा लांघी- ओम बिड़ला
स्पीकर ने कहा, “देश ने देखा कि कल सदन में क्या हुआ। सांसदों ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं और प्रधानमंत्री की कुर्सी की ओर बढ़ने की कोशिश की गई। मुझे जानकारी मिली थी कि कोई अप्रिय घटना हो सकती है, इसलिए ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसीलिए मैंने प्रधानमंत्री से सदन में न आने को कहा।” स्पीकर के इस बयान के बाद यह भी सामने आया कि हंगामे के दौरान कुछ विपक्षी महिला सांसद प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुंच गई थीं। जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें आर. सुधा, ज्योतिमणि, वर्षा गायकवाड़, गेनी बेन ठाकोर, के. काव्या और शोभा बच्छाव शामिल हैं। सत्ता पक्ष का आरोप है कि यह स्थिति सदन की सुरक्षा और गरिमा के लिहाज से बेहद गंभीर थी।
स्पीकर के बयान पर आई कांग्रेस की तीखी प्रक्रिया
वहीं, स्पीकर के बयान पर कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने इस पूरे मामले को लेकर सरकार पर सीधा हमला बोला। प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पीकर ओम बिरला के पीछे छिप रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “कल प्रधानमंत्री में सदन में आने की हिम्मत नहीं थी क्योंकि बेंच के सामने सिर्फ तीन महिलाएं खड़ी थीं। यह क्या बकवास है?” प्रियंका गांधी ने आगे कहा कि सरकार जानबूझकर संसद में चर्चा नहीं चाहती है। उनका आरोप है कि विपक्ष लगातार अहम मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार बहस से बचने के लिए हंगामे का बहाना बना रही है। उन्होंने कहा, “कोई चर्चा इसलिए नहीं हो रही क्योंकि सरकार चर्चा से भाग रही है।”