KNEWS DESK- अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से आधिकारिक रूप से अलग होने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। गुरुवार को यह फैसला औपचारिक रूप से लागू हो गया, जिसके बाद अमेरिका और WHO के बीच दशकों पुराना संबंध समाप्त हो गया। इस कदम को लेकर पिछले एक साल से आशंकाएं जताई जा रही थीं कि इससे न केवल अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को नुकसान पहुंच सकता है।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय कोविड-19 महामारी के दौरान WHO की भूमिका और प्रबंधन में रही गंभीर चूकों के मद्देनजर लिया गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2025 में अपने कार्यकाल के पहले ही दिन एक कार्यकारी आदेश जारी कर अमेरिका को WHO से बाहर निकालने की घोषणा कर दी थी।
अमेरिकी स्वास्थ्य और विदेश विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि अब अमेरिका WHO के साथ केवल उतना ही सीमित संपर्क रखेगा, जितना संगठन से बाहर निकलने की कानूनी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आवश्यक है। एक वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट किया कि अमेरिका न तो ऑब्जर्वर के रूप में WHO से जुड़ेगा और न ही भविष्य में दोबारा सदस्य बनने की कोई योजना है। अमेरिका अब वैश्विक रोग निगरानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर सीधे अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय सहयोग करेगा।
अमेरिकी कानून के तहत WHO से अलग होने के लिए एक साल का नोटिस और करीब 26 करोड़ डॉलर की बकाया राशि चुकाने का प्रावधान है। हालांकि विदेश विभाग के एक अधिकारी ने इस व्याख्या से असहमति जताई और कहा कि संगठन छोड़ने से पहले भुगतान करना अनिवार्य नहीं है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने ईमेल के जरिए कहा कि अमेरिकी नागरिक पहले ही WHO को पर्याप्त वित्तीय सहायता दे चुके हैं।
स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग (HHS) ने गुरुवार को जारी दस्तावेज में पुष्टि की कि अमेरिका ने WHO को दी जाने वाली सभी प्रकार की फंडिंग रोक दी है। HHS के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया, क्योंकि उनका मानना है कि WHO से अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
इसी दिन जिनेवा स्थित WHO मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा भी हटा दिया गया। हाल के सप्ताहों में अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की कई अन्य एजेंसियों से भी दूरी बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
कुछ आलोचकों ने WHO के विकल्प के तौर पर एक नई वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी बनाने का सुझाव दिया है। हालांकि ट्रंप प्रशासन के भीतर पिछले वर्ष तैयार किए गए एक प्रस्ताव दस्तावेज में यह राय सामने आई थी कि अमेरिका को WHO से बाहर निकलने के बजाय संगठन में सुधारों के लिए दबाव बनाना चाहिए और वहां अमेरिकी नेतृत्व को मजबूत करना चाहिए। कई वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भी इस फैसले पर पुनर्विचार की अपील की थी।