KNEWS DESK- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत सुरक्षा और निजी संपत्ति के अधिकारों का इस्तेमाल सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था को प्रभावित करने के लिए नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने निजी संपत्ति पर बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा कर नमाज अदा करने पर रोक लगा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बरेली निवासी तारिक खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता ने रमजान के दौरान निजी संपत्ति पर नमाज पढ़ने से रोक लगाने और शांति भंग के आरोप में किए गए चालान को चुनौती दी थी।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बरेली के जिला मजिस्ट्रेट और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को तलब किया था, जो कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता सुरक्षा के नाम पर नियमों का दुरुपयोग कर रहा है।
हलफनामे और साक्ष्यों के आधार पर अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की निजी संपत्ति पर रोजाना 50 से अधिक लोग नमाज के लिए इकट्ठा हो रहे थे, जिससे क्षेत्र की सांप्रदायिक शांति और सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा था। कोर्ट ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और ऐसी गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती जो सार्वजनिक शांति को प्रभावित करें।
हालांकि, सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि भविष्य में संपत्ति पर बड़ी संख्या में लोगों को इकट्ठा नहीं किया जाएगा। इस पर अदालत ने उम्मीद जताई कि दिए गए वचन का पालन किया जाएगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में इस आश्वासन का उल्लंघन होता है, तो प्रशासन को सख्त कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।
कोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को जारी चालान को वापस लेने का निर्देश दिया और इस मामले में जारी अवमानना नोटिसों को भी रद्द कर दिया। इसके अलावा, पूर्व में दी गई सुरक्षा व्यवस्था को भी समाप्त करने का आदेश दिया गया।
इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण कर दिया और यह स्पष्ट संदेश दिया कि निजी अधिकारों से ऊपर सार्वजनिक शांति और कानून व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी।