KNEWS DESK – लोकसभा में सोमवार को नियम 193 के तहत नक्सलवाद पर चर्चा के दौरान एक दिलचस्प और सौहार्दपूर्ण दृश्य देखने को मिला। समाजवादी पार्टी के सांसद Dharmendra Yadav अपनी बात रख रहे थे, तभी केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने खुद खड़े होकर उन्हें और समय देने की सिफारिश की।
सदन में दिखी सकारात्मक पहल
दरअसल, धर्मेंद्र यादव अपने भाषण के दौरान कई सुझावों का जिक्र कर रहे थे और उन्होंने कहा कि समय कम होने के कारण वह सभी बिंदु नहीं रख पाएंगे। इस पर अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुए चेयर से कहा कि उन्हें और समय दिया जाए। इसके बाद चेयर की भूमिका निभा रहीं Kumari Selja ने उन्हें अतिरिक्त समय प्रदान किया।
नक्सलवाद पर सरकार के दावों से असहमति
अपने संबोधन में धर्मेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का यह दावा पूरी तरह सही नहीं है कि नक्सलवाद पूरी तरह समाप्त हो चुका है, हालांकि उन्होंने यह जरूर माना कि इसमें कमी आई है। उन्होंने नक्सल प्रभावित राज्यों—छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और महाराष्ट्र—की समस्याओं का जिक्र करते हुए समाधान पर जोर दिया।
‘बातचीत से निकला समाधान’
सपा सांसद ने पूर्व मुख्यमंत्री Mulayam Singh Yadav का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने नक्सलवाद से निपटने के लिए संवाद का रास्ता अपनाया था, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए। उन्होंने कहा कि इसी नीति के चलते उत्तर प्रदेश आज नक्सलमुक्त है।
आदिवासी मुद्दों पर उठाए सवाल
धर्मेंद्र यादव ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों और विकास पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा, तेंदूपत्ता और अन्य संसाधनों पर बाहरी लोगों का कब्जा है, जबकि स्थानीय लोगों को उनका हक नहीं मिल रहा। उन्होंने कुपोषण, शिक्षा में गिरावट और योजनाओं के कमजोर क्रियान्वयन जैसे मुद्दे भी उठाए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद की समस्या का स्थायी समाधान केवल सुरक्षा बलों के जरिए नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुधारों के जरिए संभव है। साथ ही उन्होंने पैरामिलिट्री बलों के सम्मान और अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए।