77वां गणतंत्र दिवस: कर्तव्य पथ पर भारत की शक्ति, यूरोपीय मेहमानों की मौजूदगी में दिखेगा वैश्विक भरोसा

डिजिटल डेस्क- आज पूरा देश 77वां गणतंत्र दिवस पूरे उत्साह और गर्व के साथ मना रहा है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू तिरंगा फहराने के बाद परेड की सलामी लेंगी। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की सैन्य शक्ति, सांस्कृतिक विविधता और तकनीकी क्षमता की भव्य झलक देखने को मिलेगी। देशभर के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी गणतंत्र दिवस के मौके पर तिरंगा फहराया जा रहा है और विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इस बार का गणतंत्र दिवस समारोह अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से भी खास माना जा रहा है। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हो रहे हैं। उनकी मौजूदगी भारत और यूरोप के बीच मजबूत होते कूटनीतिक और आर्थिक रिश्तों को दर्शाती है।

परेड के बाद ईयू एग्रीमेंट पर कर सकता है हस्ताक्षर

माना जा रहा है कि परेड के बाद भारत और यूरोपीय संघ के वरिष्ठ अधिकारी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। अगर यह समझौता होता है, तो यह भारत-ईयू संबंधों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। इस समझौते से व्यापार, निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, जिससे दोनों पक्षों को आर्थिक लाभ मिलेगा। उर्सुला वॉन डेर लेयन वर्तमान में यूरोपीय संघ के केंद्रीय कार्यकारी निकाय यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष हैं। यूरोपीय आयोग यूरोपीय संघ की नीतियों को लागू करने और नए कानून प्रस्तावित करने की अहम भूमिका निभाता है।

गणतंत्र दिवस पर इंडियन आर्मी की झांकी रहेगी आकर्षण का केंद्र

इस पद के लिए हर पांच साल में यूरोप में चुनाव होते हैं, जिसमें फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, हंगरी समेत 27 यूरोपीय देशों के राजनीतिक दल हिस्सा लेते हैं। इसी प्रक्रिया के जरिए यूरोपीय आयोग के नेतृत्व का चयन किया जाता है। गणतंत्र दिवस परेड में इस बार भी भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके साथ ही विभिन्न राज्यों की झांकियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विरासत, लोक कलाओं और विकास की उपलब्धियों को दर्शाया जाएगा। आधुनिक हथियार प्रणालियों और स्वदेशी रक्षा तकनीक का प्रदर्शन ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में देश की प्रगति को उजागर करेगा।

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