KNEWS DESK – देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने अदालती याचिकाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना सत्यापन के AI टूल्स का उपयोग न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह कर सकता है।
फर्जी उद्धरणों पर नाराजगी
मामले की सुनवाई के दौरान Surya Kant की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें Joymalya Bagchi और BV Nagarathna शामिल थीं, ने इस मुद्दे पर टिप्पणी की।
पीठ ने कहा कि हाल के दिनों में ऐसे उदाहरण सामने आए हैं, जहां वकीलों ने AI की मदद से तैयार याचिकाओं में ऐसे फैसलों और उद्धरणों का हवाला दे दिया, जो वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने एक चौंकाने वाला उदाहरण देते हुए बताया कि अदालत के समक्ष ‘दया बनाम मानवता’ नामक एक कथित निर्णय का हवाला दिया गया, जिसका कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार वास्तविक फैसलों के ऐसे अंश पेश किए जाते हैं, जो मूल निर्णय में दर्ज ही नहीं होते।
पहले भी सामने आ चुका है मामला
पीठ ने बताया कि इसी तरह की स्थिति पहले Dipankar Datta की अदालत में भी देखने को मिली थी। वहां जिन पूर्व निर्णयों का हवाला दिया गया, वे सभी मनगढ़ंत निकले।
सीजेआई ने स्पष्ट किया कि तकनीक का इस्तेमाल शोध और संदर्भ जुटाने में मददगार हो सकता है, लेकिन अंतिम जिम्मेदारी वकील की ही है। बिना जांच-पड़ताल के AI पर निर्भर रहना न्यायिक प्रक्रिया के लिए खतरा बन सकता है।