जोधपुर जेल में भी पर्यावरण पर प्रयोग करना चाहते हैं सोनम वांगचुक, पत्नी ने बताई अंदर की कहानी…

KNEWS DESK- जलवायु एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक बीते 110 दिनों से जोधपुर जेल में बंद हैं, लेकिन जेल की चारदीवारी भी उनके विचारों और प्रयोगों को रोक नहीं पाई है। उनकी पत्नी और हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ अल्टरनेटिव्स लद्दाख (HIAL) की को-फाउंडर गीतांजलि जे आंगमो ने खुलासा किया है कि वांगचुक जेल बैरकों को बेहतर बनाने के लिए इको-रिस्पॉन्सिव आर्किटेक्चर पर प्रयोग करना चाहते हैं। इसी मकसद से उन्होंने जेल प्रशासन से थर्मामीटर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

बुधवार को X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए गीतांजलि आंगमो ने बताया कि वह मंगलवार को अपने पति से मिलने जोधपुर जेल गई थीं। इस दौरान वह वांगचुक के लिए कुछ खास किताबें लेकर गईं, जिनकी वह लंबे समय से मांग कर रहे थे। इनमें चींटियों और जलवायु परिवर्तन पर आधारित किताबें शामिल हैं।

आंगमो ने लिखा कि उन्होंने वांगचुक को उनके बड़े भाई की ओर से उपहार में दी गई किताब ‘Ants: Workers of the World’ दी, जिसे एलेनोर स्पाइसर राइस और एडुआर्ड फ्लोरिन निगा ने लिखा है। इसके अलावा जलवायु परिवर्तन और उसके समाधान पर आधारित किताबें भी उन्हें सौंपी गईं।

उन्होंने यह भी बताया कि वांगचुक ने उनसे कहा है कि वह जेल प्रशासन और सुप्रीम कोर्ट से यह पता करें कि क्या उन्हें थर्मामीटर जैसे साधारण वैज्ञानिक उपकरण मिल सकते हैं। इन उपकरणों की मदद से वह जेल बैरकों के तापमान और संरचना का अध्ययन कर, उन्हें अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए कुछ प्रयोग करना चाहते हैं।

HIAL की को-फाउंडर गीतांजलि आंगमो ने इससे पहले PTI को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वांगचुक अपनी जेल बैरक में चींटियों को करीब से देख रहे हैं। वह फिलहाल एकांत में रखे गए हैं और अपने आसपास के वातावरण का गहराई से अवलोकन कर रहे हैं।

आंगमो के मुताबिक, “जब वह चींटियों और उनके व्यवहार को देखते हैं, तो मुझसे कहते हैं कि मैं उस पर किताबें लाकर दूं। चींटियों के समुदाय में गजब की एकता और टीम भावना होती है। शायद वह उसी से कुछ सीखना और समझना चाहते हैं।”

गौरतलब है कि मैगसेसे पुरस्कार विजेता सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। उन पर लद्दाख को राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए विरोध प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप है, जिनमें करीब 90 लोग घायल हुए थे।

गीतांजलि आंगमो ने उनकी हिरासत को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की है, ताकि वह देश और पर्यावरण के लिए अपना काम जारी रख सकें। इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी को निर्धारित है।

जेल में रहते हुए भी सोनम वांगचुक का पर्यावरण, समाज और सीखने की प्रक्रिया से जुड़ा रहना उनके विचारों और प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसने एक बार फिर उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

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