वर्क-लाइफ बैलेंस पर एस जयशंकर का बेबाक बयान: बोले– मेरे जीवन में छुट्टी जैसा कोई दिन नहीं

डिजिटल डेस्क- वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर देश और दुनिया में लंबे समय से बहस चल रही है। कामकाजी लोगों का मानना है कि प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन बेहद जरूरी है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बना रहे। इसी बहस के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर का एक बयान चर्चा में आ गया है, जिसमें उन्होंने साफ कहा है कि उनके जीवन में छुट्टी जैसा कोई दिन नहीं होता। चेन्नई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) मद्रास में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने कामकाज और जीवनशैली को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “मेरे जीवन में छुट्टी का कोई दिन नहीं है। ऐसा नहीं है कि मैं पारंपरिक रूप से सोमवार से शुक्रवार तक काम करता हूं और शनिवार-रविवार को सब कुछ बंद कर देता हूं, क्योंकि दुनिया इस तरह से नहीं चलती।”

मेरी जिंदगी उलझी हुई… कोई एक टाइम जोन नहीं- एस जयशंकर

जयशंकर ने बताया कि विदेश मंत्री का काम वैश्विक स्तर से जुड़ा होता है, जहां अलग-अलग देशों के टाइम जोन होते हैं। ऐसे में किसी एक समय-सारिणी या तय दिनचर्या में काम करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी किसी एक टाइम जोन पर आधारित नहीं है और इसमें ऑन या ऑफ जैसा कोई बटन नहीं है। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में विदेश मंत्री ने कहा, “मेरी जिंदगी काफी उलझी हुई है। यह किसी एक टाइम जोन पर काम नहीं करती। कई बार जब दुनिया का एक हिस्सा सो रहा होता है, तब दूसरा हिस्सा जाग रहा होता है और आपको हर समय तैयार रहना पड़ता है।” हालांकि, जयशंकर ने यह भी साफ किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि उनकी जिंदगी में संतुलन की कमी है। उन्होंने कहा कि वर्क-लाइफ बैलेंस सिर्फ छुट्टी लेने से नहीं आता, बल्कि सही आदतें और शौक विकसित करने से आता है। जयशंकर के मुताबिक, वह अपनी जिंदगी में ऐसी प्रैक्टिस और हॉबीज अपनाते हैं, जो उन्हें मानसिक रूप से स्थिर और संतुलित बनाए रखती हैं। उन्होंने कहा, “मैं जो करने की कोशिश करता हूं, वह यह है कि अपनी जिंदगी के भीतर ऐसी आदतें और शौक विकसित करूं, जो आपको एक समझदार, स्थिर और मिलनसार इंसान बनाएं, ताकि आप बाकी दुनिया से बेहतर तरीके से निपट सकें।”

विदेश मंत्री की बात सुन जमकर लगे ठहाके

डिजिटल डिटॉक्स और ब्रेक को लेकर भी विदेश मंत्री ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अगर किसी का रोजाना का रूटीन अच्छी तरह से डिजाइन किया गया हो, जिसमें पढ़ना, लिखना, सोचना, बातचीत करना और फिजिकल एक्टिविटी शामिल हो, तो अलग से छुट्टी या अनप्लग होने की जरूरत नहीं पड़ती। जयशंकर के अनुसार, ऐसा संतुलित रूटीन अपने आप में मानसिक सुकून देता है। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि जरूरी नहीं कि वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर उनके विचारों से घर में सभी सहमत हों। मुस्कुराते हुए उन्होंने कहा, “मेरी पत्नी यहां बैठी हैं और वह मुझसे असहमत हो सकती हैं।” विदेश मंत्री की इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े।