KNEWS DESK- लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को उस समय तीखी बहस देखने को मिली, जब पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने भारतीय रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। प्रश्नकाल के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि आम दिनों में ट्रेनों और कोचों की कमी का हवाला दिया जाता है, लेकिन चुनावी समय में अचानक बड़ी संख्या में ट्रेनों की घोषणा कर दी जाती है। उन्होंने कहा कि जब यात्रियों को कन्फर्म टिकट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है और वेटिंग लिस्ट लगातार बढ़ती रहती है, तो ऐसे में चुनाव के दौरान अतिरिक्त ट्रेनों की उपलब्धता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पप्पू यादव ने इसे चुनावी रणनीति से जोड़ते हुए कहा कि जनता को यह बताया जाना चाहिए कि यदि संसाधन उपलब्ध हैं, तो उन्हें नियमित रूप से क्यों नहीं चलाया जाता। उन्होंने रेलवे की क्षमता और प्रबंधन को लेकर पारदर्शिता की मांग की और कहा कि यात्रियों की सुविधाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, न कि चुनावी घोषणाओं को।
उनके इन आरोपों का जवाब देने के लिए केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद खड़े हुए और उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया। रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे एक सुव्यवस्थित नेटवर्क के तहत काम करता है और मांग के अनुसार विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं, खासकर त्योहारों और भीड़भाड़ के समय यात्रियों की सुविधा के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन ट्रेनों को चुनाव से जोड़ना पूरी तरह गलत है और इससे सदन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि हाल के वर्षों में भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। नई रेल लाइनों का निर्माण, ट्रैक का आधुनिकीकरण और ट्रेनों की संख्या में वृद्धि लगातार की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि दीवाली और छठ जैसे त्योहारों के दौरान हजारों विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जिससे यात्रियों को काफी राहत मिली।
हालांकि, पप्पू यादव मंत्री के जवाब से संतुष्ट नहीं दिखे और उन्होंने अपने सवालों को बरकरार रखा। इस बहस ने एक बार फिर रेलवे की कार्यप्रणाली, संसाधनों के उपयोग और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर संसद में नई चर्चा को जन्म दे दिया है।