KNEWS DESK – सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद हरीश राणा को एम्स, दिल्ली में शिफ्ट किया गया है, जहां उन्हें निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) के तहत सम्मानजनक तरीके से विदाई दी जाएगी। यह भारत में अदालत की अनुमति से इच्छामृत्यु का पहला मामला माना जा रहा है।
करीब 13 साल से वेजिटेटिव स्टेट में जीवन जी रहे हरीश के मामले में डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे लाइफ सपोर्ट हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि उन्हें लंबे समय से चल रहे असहनीय कष्ट से मुक्ति मिल सके।
परिवार की भावनात्मक तैयारी
32 वर्षीय हरीश को शनिवार सुबह एम्स में शिफ्ट किया गया। उनके परिवार ने इस दर्दनाक क्षण के लिए खुद को तैयार किया है। उनके पिता अशोक राणा ने कहा, “हमने इस दर्द के साथ 4,588 दिन बिताए हैं, लेकिन अपने बेटे के दुख को खत्म करने का फैसला और भी दर्दनाक है।”
13 मार्च, 2026 को साहिबाबाद के मोहन नगर में ब्रह्मा कुमारीज सेंटर, प्रभु मिलन भवन की स्पिरिचुअल लीडर सिस्टर कुमारी लवली दीदी ने हरीश के घर जाकर उन्हें शांति से अलविदा कहा। उन्होंने उनके माथे पर चंदन का तिलक लगाया और प्रार्थना की।
गंभीर चोट के बाद से वेजिटेटिव स्टेट
हरीश राणा को 2013 में एक पेइंग गेस्ट अकोमोडेशन की चौथी मंजिल से गिरने के बाद गंभीर चोटें आई थीं। तब से वह क्लिनिकली असिस्टेड न्यूट्रिशन (CAN) पर जीवन यापन कर रहे हैं। उनके लिए सांस लेने और खाने के लिए ट्रेकियोस्टॉमी और गैस्ट्रोजेजुनोस्टॉमी ट्यूब का उपयोग किया जाता रहा है।
उनकी हालत क्वाड्रिप्लेजिया और 100 प्रतिशत डिसेबिलिटी के साथ बेहद नाजुक है, जिसके लिए उन्हें रोजाना लगातार मेडिकल मदद की जरूरत है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी और उनके सम्मानजनक तरीके से लाइफ सपोर्ट हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने के लिए मेडिकल टीम को दिशा-निर्देश दिए कि राणा की अंतिम विदाई पूरी गरिमा और सुरक्षा के साथ हो।
मुख्य उद्देश्य यह है कि हरीश को लंबे समय से चल रहे असहनीय कष्ट से मुक्ति मिले और उनके परिवार को सम्मानजनक ढंग से इस कठिन फैसले को निभाने का अवसर मिले।