आधी सदी पुराना मामला… सोनिया गांधी केस में कोर्ट ने पूछा- अब जांच किसके खिलाफ और कैसे?

KNEWS DESK- दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से जुड़े एक पुराने मामले को लेकर सुनवाई हुई, जिसमें उनकी नागरिकता और मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए हैं। यह मामला करीब आधी सदी पुराना बताया जा रहा है, लेकिन एक आपराधिक पुनरीक्षण याचिका के जरिए इसे फिर से अदालत के सामने लाया गया है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही वर्ष 1980 में मतदाता सूची में शामिल कर लिया गया था, जो कथित रूप से धोखाधड़ी और जाली दस्तावेजों के माध्यम से संभव हुआ। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत में दलील दी कि प्रथम दृष्टया यह मामला झूठी घोषणा और दस्तावेजों में हेरफेर का प्रतीत होता है, जिसकी जांच जरूरी है। उन्होंने अदालत से जालसाजी और फर्जीवाड़े के एंगल से मामले की जांच और FIR दर्ज करने की मांग की।

हालांकि सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामला अत्यंत पुराना है और ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अब जांच का दायरा किसके खिलाफ और किस आधार पर तय किया जाएगा। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि फिलहाल जो जानकारी प्रस्तुत की जा रही है, वह केवल मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की परिस्थितियों तक सीमित है।

दूसरी ओर, सोनिया गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि इस बात का कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि नाम जुड़वाने के समय उनकी नागरिकता की स्थिति क्या थी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या कोई व्यक्ति आवेदन करने से पहले नागरिक नहीं हो सकता। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि यह याचिका बिना ठोस आधार के एक व्यापक और अनिश्चित जांच की मांग कर रही है।

यह याचिका वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है, जिसमें अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया के 11 सितंबर 2025 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें पहले इसी मामले में पुलिस जांच और FIR दर्ज करने की मांग को खारिज कर दिया गया था।

याचिका के अनुसार, वर्ष 1980 में सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्होंने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन किया था। बाद में 1982 में उनका नाम सूची से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह पूरी प्रक्रिया फर्जीवाड़े के जरिए की गई थी।

मामले में अब अगली सुनवाई 18 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जहां अदालत आगे की कार्रवाई पर विचार करेगी।

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