पश्चिम एशिया संकट पर प्रधानमंत्री आवास पर सीसीएस की हुई बैठक, जानें क्या हुई चर्चा…

KNEWS DESK- भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में जारी संकट के प्रभावों को देखते हुए उच्च स्तर पर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री आवास पर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) की अहम बैठक हुई, जो करीब ढाई घंटे तक चली। इस बैठक में देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता पर संभावित असर को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण कदमों पर चर्चा की गई।

बैठक में कृषि, उर्वरक, शिपिंग, एविएशन, लॉजिस्टिक्स और MSME जैसे प्रमुख सेक्टरों की स्थिति की समीक्षा की गई। साथ ही LPG और LNG की सप्लाई को स्थिर बनाए रखने के लिए स्रोतों के विविधीकरण (डायवर्सिफिकेशन) पर जोर दिया गया। ईंधन पर संभावित दबाव को कम करने के लिए फ्यूल ड्यूटी में कमी और पावर सेक्टर को मजबूत करने के उपायों पर भी विचार किया गया।

सरकार ने यह स्पष्ट किया कि आम जनता को महंगाई से राहत देने के लिए जरूरी वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जमाखोरी और कालाबाज़ारी को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखने हेतु कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।

उर्वरक आपूर्ति को लेकर भी सरकार सतर्क नजर आई। यूरिया उत्पादन को बनाए रखने और DAP/NPKS जैसे उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विदेशी आपूर्तिकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने पर चर्चा हुई। आने वाले खरीफ और रबी सीज़न को ध्यान में रखते हुए किसानों की जरूरतों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।

प्रधानमंत्री मोदी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आम नागरिकों तक सही और समय पर जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि किसी भी तरह की अफवाह को रोका जा सके। उन्होंने कहा कि इस वैश्विक संकट के असर से देशवासियों को बचाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएं।

बैठक में यह भी बताया गया कि देश में कोयले का पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे आने वाले महीनों में बिजली की मांग को पूरा किया जा सकेगा। इस दौरान रक्षा मंत्री Rajnath Singh, गृह मंत्री Amit Shah, वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman और विदेश मंत्री S. Jaishankar समेत कई वरिष्ठ मंत्री मौजूद रहे।

इससे पहले 22 मार्च को हुई बैठक में भी सरकार ने पश्चिम एशिया के हालातों की समीक्षा की थी और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए मंत्रियों और सचिवों के एक समूह के गठन का निर्णय लिया था। सरकार लगातार बदलते वैश्विक परिदृश्य पर नजर बनाए हुए है और देश की आर्थिक व सामाजिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठा रही है।

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