KNEWS DESK – क्या सच में मौत के करीब जाकर इंसान कुछ महसूस करता है? क्या दिल की धड़कन रुकने के बाद भी कोई अनुभव बाकी रहता है? ये सवाल अक्सर लोगों के मन में उठते हैं। लेकिन Lauren Canaday की कहानी इन सवालों को एक नया नजरिया देती है।
लॉरेन के लिए वह दिन बिल्कुल आम था, लेकिन कुछ ही पलों में सब बदल गया। अचानक आए गंभीर हार्ट अटैक ने उनकी दिल की धड़कन पूरी तरह रोक दी। हालात इतने गंभीर हो गए कि करीब 24 मिनट तक उनका दिल नहीं धड़का। यह एक ऐसा समय था, जब मेडिकल साइंस के मुताबिक उम्मीद बेहद कम रह जाती है।
उनके पति ने बिना देर किए CPR देना शुरू किया, जो उनकी जिंदगी बचाने की पहली कड़ी साबित हुई। इसके बाद पहुंची मेडिकल टीम ने लगातार प्रयास जारी रखा और आखिरकार लॉरेन की सांसें वापस आ सकीं। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।
दिल की धड़कन वापस आने के बाद भी खतरा टला नहीं था। लॉरेन को ICU में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने 9 दिन बिताए। इस दौरान वह 2 दिन तक कोमा में रहीं। परिवार के लिए यह वक्त बेहद मुश्किल था, हर पल डर, हर पल उम्मीद।
होश में आने के बाद लॉरेन ने महसूस किया कि उनकी जिंदगी बदल चुकी है। दिल के दौरे से पहले के कई दिन उनकी यादों से पूरी तरह गायब हो चुके थे। इतना ही नहीं, उन्हें बोलने और लिखने जैसे सामान्य कामों में भी परेशानी होने लगी।
हालांकि डॉक्टरों ने यह साफ किया कि उनके दिमाग को कोई स्थायी नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन मानसिक और भावनात्मक रूप से वह खुद को पहले जैसा नहीं महसूस कर पा रही थीं।
अक्सर कहा जाता है कि मौत के करीब जाने पर रोशनी या सुरंग दिखाई देती है। लेकिन लॉरेन का अनुभव बिल्कुल अलग था। उन्होंने बताया कि उन्हें कोई दृश्य नहीं दिखा, बल्कि एक बेहद गहरा और सुकून भरा एहसास हुआ।
यह शांति इतनी गहरी थी कि होश में आने के बाद भी कई हफ्तों तक वह उनके साथ बनी रही। इस अनुभव ने उनकी सोच पूरी तरह बदल दी, अब उन्हें मौत से डर नहीं लगता।
इस घटना के बाद लॉरेन अपनी जिंदगी को दो हिस्सों में देखती हैं, पहले की जिंदगी और इस घटना के बाद की जिंदगी। उनके लिए यह किसी नए जन्म जैसा है। वह अब धीरे-धीरे सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं, लेकिन उनके सीने में लगा डिफिब्रिलेटर उन्हें हर पल उस घटना की याद दिलाता है। बाहरी तौर पर सब कुछ सामान्य दिखता है, लेकिन अंदर से वह खुद को बदला हुआ महसूस करती हैं