Knews Desk– पंजाब में धान की कटाई अंतिम दौर में पहुंचने के साथ ही पराली जलाने के मामलों में तेजी आई है। किसान अगली फसल की बुआई के लिए खेतों को जल्द तैयार करने के उद्देश्य से पराली में आग लगा रहे हैं। इसके चलते राज्य के कई शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ रहा है। प्रशासन ने नियमों का उल्लंघन करने वाले किसानों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 3 नवंबर को पंजाब में एक ही दिन में पराली जलाने के 584 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही 15 सितंबर से अब तक ऐसे मामलों की कुल संख्या बढ़कर 2,196 हो गई है। पिछले चार दिनों में भी पराली जलाने की करीब 1,000 घटनाएं सामने आने की जानकारी है। पराली जलाने की बढ़ती घटनाओं का असर राज्य के प्रमुख शहरों की हवा पर दिखाई दे रहा है।संगरूर में सुबह के समय धुएं और स्मॉग की मोटी चादर छाई रही। कई जगहों पर दृश्यता इतनी कम हो गई कि नेशनल हाईवे भी ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। आसमान में सूरज भी धुएं के बीच ढका नजर आया। राज्य के विभिन्न जिलों में खेतों के किनारे जली हुई पराली के अवशेष देखे जा रहे हैं। कुछ किसान पराली जलाने के बाद ट्रैक्टर से खेतों की जुताई कर देते हैं, ताकि आग लगाने के सबूत मिट जाएं और प्रशासन की कार्रवाई से बचा जा सके।
पंजाब के कई शहरों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब स्थिति में पहुंच गया है। खन्ना में AQI 293 दर्ज किया गया है, जबकि लुधियाना और अमृतसर में यह औसतन 200 से 250 के पार बना हुआ है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी हवाओं की धीमी गति के कारण पराली से निकलने वाला धुआं और स्मॉग वातावरण में जमा हो रहा है, जिससे प्रदूषण की स्थिति और गंभीर हो रही है।पराली जलाने पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन अब तक 573 से अधिक मामलों में 29 लाख रुपये से ज्यादा का पर्यावरण मुआवजा लगा चुका है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 423 से ज्यादा आधिकारिक एफआईआर दर्ज की गई हैं। हालांकि, कार्रवाई के बावजूद पराली जलाने की घटनाओं में बढ़ोतरी राज्य के लिए चुनौती बनी हुई है। खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर नियंत्रण और प्रदूषण के स्तर में कमी लाने के लिए प्रशासन की सख्ती कितनी प्रभावी साबित होगी, इस पर नजर बनी हुई है।